हैदराबाद। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में विकास के मंच पर राजनीति का एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत ने न केवल जनता को हैरान किया, बल्कि भविष्य के नए राजनीतिक समीकरणों की ओर भी इशारा कर दिया।
रेवंत रेड्डी का 'तारीफ' वाला दांव
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री मोदी के सामने अपनी बात रखते हुए अतीत का एक पन्ना खोला। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल को याद करते हुए कहा:
"जब आप (मोदी) गुजरात के मुख्यमंत्री थे और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब आपको केंद्र से इतनी मदद मिली कि आपने 10 साल में विकास का एक शानदार 'गुजरात मॉडल' खड़ा कर दिया।"
रेड्डी ने आगे कहा कि आज तेलंगाना की गरीब जनता भी प्रधानमंत्री से वैसी ही उम्मीद रखती है और चाहती है कि केंद्र राज्य के विकास में बढ़-चढ़कर हाथ बटाए।
पीएम मोदी का 'तथ्यात्मक' पलटवार: "आधा रह जाएगा फंड"
मुख्यमंत्री की इस 'गुगली' को पीएम मोदी ने बड़ी चतुराई से संभाला। उन्होंने मंच से मुस्कुराते हुए स्पष्ट किया कि तेलंगाना की वर्तमान स्थिति गुजरात के उस दौर से कहीं बेहतर है। पीएम ने कहा:
गणित की सीख: "रेवंत जी, अगर मैं तेलंगाना को सिर्फ उतना ही दूँ जितना उस समय गुजरात को मिला था, तो आपके राज्य को मिलने वाली मौजूदा मदद सीधे आधी रह जाएगी। इससे तेलंगाना का विकास बढ़ने के बजाय पिछड़ जाएगा।"
बड़ा दिल: पीएम ने भरोसा दिलाया कि वह तेलंगाना को वर्तमान में जो मिल रहा है, उससे कहीं अधिक देने के लिए तैयार हैं ताकि राज्य विकास की नई ऊंचाइयों को छुए।
सियासी गलियारों में हलचल: गठबंधन का 'खुला ऑफर'?
बात सिर्फ आंकड़ों तक ही नहीं रुकी। अपनी बात खत्म करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने रेवंत रेड्डी को एक ऐसा ऑफर दे दिया जिसने राजनीतिक जानकारों के कान खड़े कर दिए। पीएम मोदी ने बड़ी चतुराई से सलाह देते हुए कहा कि तेलंगाना के भले के लिए मुख्यमंत्री को उनके साथ गठबंधन कर लेना चाहिए।
निष्कर्ष: विकास की मांग या नई दोस्ती का आगाज?
यह पूरा वाकया इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रेवंत रेड्डी कांग्रेस के फायरब्रांड नेता माने जाते हैं। ऐसे में मंच पर पीएम मोदी की तारीफ करना और बदले में पीएम द्वारा साथ आने का न्योता देना, तेलंगाना की राजनीति में आने वाले 'बड़े बदलाव' की सुगबुगाहट पैदा कर रहा है। क्या यह विकास के लिए हाथ मिलाने की शुरुआत है या 2029 की नई बिसात, यह तो वक्त ही बताएगा।





