चंडीगढ़/नई दिल्ली: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक 10 महीने पहले राज्य की राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर हुआ है। आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सांसदों ने एक साथ बगावत करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का निर्णय लिया है। इस सामूहिक दलबदल ने न केवल 'आप' के संगठन को हिला दिया है, बल्कि पंजाब के आगामी चुनावी समीकरणों को भी पूरी तरह पलट कर रख दिया है।
इन दिग्गजों ने बदला पाला
बगावत की कमान कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद रहे राघव चड्ढा ने संभाली। उनके साथ जाने वाले सांसदों में शामिल हैं:
संदीप पाठक (पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार)
हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर)
अशोक मित्तल (लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर)
विक्रमजीत सिंह साहनी
संजीव अरोड़ा
राजेंद्र गुप्ता
स्वाति मालीवाल (दिल्ली कोटे से सांसद)
संवैधानिक पेच: सांसदों ने दावा किया है कि चूंकि वे राज्यसभा में 'आप' के कुल 10 सांसदों में से दो-तिहाई (7 सांसद) हैं, इसलिए उन पर दल-बदल विरोधी कानून लागू नहीं होगा और वे भाजपा में एक गुट के रूप में विलय कर सकेंगे।
बगावत की वजह: 'सिद्धांतों से भटकी पार्टी'
भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने 'आप' नेतृत्व पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि जो पार्टी भ्रष्टाचार खत्म करने के संकल्प के साथ बनी थी, वह आज "भ्रष्ट और समझौतावादी व्यक्तियों" के हाथों की कठपुतली बन गई है। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से पूरी तरह भटक चुकी है, जिसके कारण उन्हें यह कठिन निर्णय लेना पड़ा।
भगवंत मान का पलटवार: "ये पंजाब के गद्दार हैं"
इस घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कड़ा रुख अपनाते हुए बागी सांसदों को 'गद्दार' करार दिया है। चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा:
"ये चुने हुए प्रतिनिधि नहीं हैं: इन्हें पार्टी ने थाली में सजाकर पद दिए थे। इनमें से कोई एक गांव का सरपंच बनने की भी काबिलियत नहीं रखता।"
"जनता देगी जवाब: पंजाब के लोग गद्दारों को कभी माफ नहीं करते। इन लोगों ने पंजाब के जनादेश के साथ धोखा किया है।"
"सहानुभूति कार्ड: मान ने इसे भाजपा की 'ऑपरेशन लोटस' की साजिश बताते हुए जनता के बीच 'सहानुभूति कार्ड' खेलने के संकेत दिए हैं।
भाजपा की रणनीति और अन्य दलों की हलचल
भाजपा: 2022 में केवल 2 सीटें जीतने वाली भाजपा अब इन दिग्गज चेहरों के माध्यम से पंजाब में अपना आधार मजबूत करने की फिराक में है। पार्टी इन नए नेताओं के सहारे शहरी और मध्यम वर्ग के वोटों में सेंध लगाने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस और शिअद: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और सुखपाल खैरा ने इसे 'आप' के अंत की शुरुआत बताया है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) इसे पंजाब के हितों के साथ खिलवाड़ बताकर अपने पारंपरिक वोट बैंक को वापस खींचने की कोशिश में जुट गया है।
निष्कर्ष
पंजाब में 'आप' के लिए यह संकट का समय है। एक ओर जहां उसे अपने संगठन को बिखरने से बचाना है, वहीं दूसरी ओर भाजपा की इस आक्रामक चुनौती का सामना करना है। 2027 की चुनावी जंग अब केवल 'विकास' पर नहीं, बल्कि 'वफादारी बनाम गद्दारी' के नैरेटिव पर लड़ी जाएगी।





