चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में एक नया और नाटकीय मोड़ सामने आया है। मुख्यमंत्री विजय की सरकार के विश्वास मत (Floor Test) के दौरान पार्टी लाइन से हटकर मतदान करने वाले 24 बागी विधायकों के खिलाफ अन्नाद्रमुक (AIADMK) ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। पार्टी महासचिव ई. पलानीस्वामी (EPS) ने इन विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के पास औपचारिक याचिका दायर की है।

व्हिप का उल्लंघन और 'बाग़ी' सुर

एआईएडीएमके ने आरोप लगाया कि इन विधायकों ने पार्टी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक 'व्हिप' का खुला उल्लंघन किया है।

निर्देश: पार्टी ने सभी विधायकों को विजय की 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) सरकार के खिलाफ वोट देने का स्पष्ट निर्देश दिया था।

कार्रवाई: व्हिप का उल्लंघन करने पर दलबदल विरोधी कानून के तहत इन 24 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है।

संगठनात्मक गाज: पार्टी ने केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए सीवी शनमुगम, एसपी वेलुमणि, और सी विजयभास्कर जैसे दिग्गज नेताओं को उनके संगठनात्मक पदों से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।

सदन का समीकरण: कैसे जीता विजय ने विश्वास मत?

आज विधानसभा में हुए बहुमत परीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री विजय अपनी सरकार बचाने में सफल रहे। सदन का गणित कुछ इस प्रकार रहा:

विवरणसंख्या / स्थिति
TVK (विजय की पार्टी) के अपने विधायक105
विजय के पक्ष में पड़े कुल वोट144
खिलाफ में पड़े वोट22
गैर-हाजिर/तटस्थ05
DMK का रुखएमके स्टालिन के नेतृत्व में 59 विधायकों ने वॉकआउट किया।

विजय को बहुमत के लिए आवश्यक जादुई आंकड़े से कहीं अधिक समर्थन मिला, जिसमें एआईएडीएमके के बागियों की बड़ी भूमिका रही।

एआईएडीएमके का पक्ष: "कुर्सी गंवाने के हकदार हैं बागी"

चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेताओं ने कड़े शब्दों में कहा कि लगभग 25 सदस्यों ने लोकतंत्र और पार्टी के सिद्धांतों के साथ विश्वासघात किया है।

"हमने आज ही स्पीकर के पास अपनी शिकायत दर्ज करा दी है। दलबदल विरोधी कानून के तहत अगर कोई सदस्य व्हिप के विरुद्ध जाता है, तो उसकी सदस्यता स्वत: समाप्त होनी चाहिए। हम इन बागियों के खिलाफ अंतिम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।"

AIADMK नेतृत्व का आधिकारिक बयान

निष्कर्ष

तमिलनाडु की राजनीति में विजय के उदय और एआईएडीएमके के भीतर इस बड़ी टूट ने राज्य के सियासी समीकरण बदल दिए हैं। जहां विजय ने अपनी सत्ता सुरक्षित कर ली है, वहीं एआईएडीएमके अब अपने अस्तित्व और अनुशासन को बचाने की चुनौती से जूझ रही है। अब सबकी नजरें विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी हैं कि क्या वे बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करते हैं या नहीं।