नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले रविवार (19 जुलाई, 2026) को केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक हंगामेदार रही। सदन के सुचारू संचालन और विधायी एजेंडे पर चर्चा के लिए आयोजित इस बैठक में न केवल विपक्ष का तीखा विरोध देखने को मिला, बल्कि आगामी 'परिसीमन विधेयक' (Delimitation Bill) को लेकर भी बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के दावों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उसने इस विधेयक को कोई समर्थन नहीं दिया है।
"परिसीमन बिल पर समर्थन की खबरें झूठी" — जयराम रमेश
बैठक के दौरान मीडिया में यह खबर तैरने लगी कि सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन विधेयक (डिलिमिटेशन बिल) को सर्वदलीय बैठक में सभी राजनीतिक दलों का समर्थन मिल गया है। इस दावे पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई।
कांग्रेस महासचिव और संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट कर कहा:
"कुछ टीवी चैनल जानबूझकर मनगढ़ंत खबरें चला रहे हैं कि सरकार द्वारा आयोजित सर्वदलीय बैठक में परिसीमन विधेयक को समर्थन मिला है। यह पूरी तरह से झूठी, बेबुनियाद और निराधार बात है।"
क्यों हुआ सर्वदलीय बैठक में विपक्ष का वॉकआउट?
इस बैठक में चर्चा से ज्यादा चर्चा विपक्ष के प्रतीकात्मक वॉकआउट (Boycott) की रही। दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने इस महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेने के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत कर 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल हुए 20 सांसदों को भी आमंत्रित किया था।
विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम को अलोकतांत्रिक बताते हुए बैठक से कुछ मिनटों के लिए वॉकआउट कर दिया।
क्या है NCPI का विवाद? कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि "यह वॉकआउट मोदी सरकार द्वारा NCPI को सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किए जाने के विरोध में था। NCPI फिलहाल टीएमसी के 20 'बागी' सांसदों के लिए सिर्फ एक पार्किंग का ठिकाना बनी हुई है, जबकि इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने को लेकर लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) का अंतिम निर्णय आना अभी बाकी है।"
मानसून सत्र में टकराव के आसार
इस सर्वदलीय बैठक में हुए हंगामे और दावों-प्रतिदावों से यह साफ हो गया है कि सोमवार से शुरू हो रहा संसद का मानसून सत्र बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है। एक तरफ जहां सरकार परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश में है, वहीं विपक्ष बागी सांसदों को दिए जा रहे तवज्जो और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह लामबंद नजर आ रहा है।





