लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सभी राजनीतिक दलों ने चुनावी गोटियाँ बिछाना शुरू कर दिया है, जिसमें समाजवादी पार्टी (सपा) भी पूरी ताकत से जुट गई है। इस बीच, राजधानी लखनऊ में सपा प्रदेश मुख्यालय के बाहर लगे नए पोस्टरों ने राज्य के सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है। इन पोस्टरों के जरिए मैनपुरी सांसद डिंपल यादव के मुख्यमंत्री बनने की चर्चाओं को नई हवा मिल गई है।

शुक्रवार को सपा कार्यालय के बाहर लगे एक पोस्टर पर लिखे स्लोगन ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। पोस्टर पर लिखा है: "27 में अखिलेश का राज, 29 में डिंपल को ताज।"

क्या है 2029 का सियासी गणित?

पोस्टर में दर्ज '2029 में डिंपल को ताज' वाले बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है।

2027 में अखिलेश, 2029 में बदलाव: चर्चा है कि यदि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी सत्ता में आती है, तो अखिलेश यादव मुख्यमंत्री की कमान संभालेंगे।

केंद्र की राजनीति में कदम: इसके बाद 2029 के लोकसभा चुनाव में केंद्र में 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की सरकार बनने की स्थिति में अखिलेश यादव केंद्रीय कैबिनेट का हिस्सा बन सकते हैं (प्रधानमंत्री या वरिष्ठ मंत्री पद)।

डिंपल यादव को कमान: ऐसी स्थिति में अखिलेश यादव के दिल्ली की राजनीति में जाने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की कमान डिंपल यादव को सौंपी जा सकती है।

'चंदा चोरी' और 'आरक्षण' पर सीधा निशाना

सपा कार्यालय के बाहर केवल भावी नेतृत्व ही नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल को घेरने वाले कई अन्य तीखे पोस्टर भी लगाए गए हैं। राम मंदिर चढ़ावा और चंदा चोरी के मुद्दों को उठाते हुए अखिलेश यादव और डिंपल यादव की तस्वीरों के साथ लिखा गया:

"चंदा चोरी, चढ़ावा चोरी और गुप्तदान की चोरी महापाप की श्रेणी में आते हैं। जो भगवान के नाम पर विश्वास की कमाई लूटते हैं, श्रीराम उन्हें कभी क्षमा नहीं करेंगे।"

वहीं, आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए एक अन्य पोस्टर में लिखा गया:

"चंदा चोरी से चला नहीं जिनका घर, कर रहे हैं अब आरक्षण पर प्रश्न-उत्तर... चंदा चोरी से जिनका नहीं भरा मन, अब आरक्षण पर कर रहे हैं मनमानापन।"

'छाता नहीं, जनता के भरोसे की छांव'

एक अन्य भावनात्मक पोस्टर में अखिलेश यादव और डिंपल यादव को एक साथ छाता थामे दिखाया गया है। इस पर संदेश दिया गया है — "छाता नहीं, जनता के भरोसे की छांव है।"

गौरतलब है कि ये सभी विवादित और चर्चित पोस्टर प्रतापगढ़ के स्थानीय सपा नेता हल्लू रामसुंदर यादव (खुद को 'समाजवादी सेवक' बताने वाले) द्वारा लगवाए गए हैं। इस पोस्टर वार के बाद प्रदेश का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है और विपक्षी खेमों में भी इसकी जोरदार चर्चा शुरू हो गई है।