लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी 'पेपर-बुक' (दस्तावेजों) को सीलबंद कर सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है, ताकि रिकॉर्ड की गोपनीयता और सुरक्षा बनी रहे।

कोर्ट का आदेश और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफर अहमद की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्देश दिया कि:

अदालती रिकॉर्ड को वरिष्ठ रजिस्ट्रार की सुरक्षित कस्टडी में रखा जाए।

अगली सुनवाई के समय केवल बेंच के सचिव ही इस सील को खोलेंगे।

यह कदम याचिकाकर्ता की उस मांग के बाद उठाया गया है, जिसमें रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की अपील की गई थी।

क्या है याचिका और मुख्य आरोप?

यह याचिका कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर की गई है। याचिका में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें की गई हैं:

CBI जांच की मांग: राहुल गांधी के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से विस्तृत जांच और नियमित मामला दर्ज करने की अपील।

पक्षकार: इस मामले में CBI के अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग, गृह मंत्रालय और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) को भी पक्षकार बनाया गया है।

आरोप: याचिकाकर्ता का दावा है कि राहुल गांधी और उनके परिवार के पास उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

अगली सुनवाई 12 मई को

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 मई, 2026 की तारीख तय की है। दोपहर 2:15 बजे होने वाली इस सुनवाई में सीलबंद रिकॉर्ड को पेश किया जाएगा और मामले की मेरिट पर आगे चर्चा होगी।

कानूनी गलियारों में चर्चा: जानकारों का मानना है कि रिकॉर्ड को सीलबंद रखने का आदेश यह दर्शाता है कि कोर्ट इस मामले के दस्तावेजों को बेहद संवेदनशील मान रहा है। 12 मई की सुनवाई पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह राहुल गांधी के लिए कानूनी मुश्किलों का नया दौर साबित हो सकता है।