चेन्नई/नई दिल्ली:
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने तमिलनाडु दौरे के दौरान नीट (NEET) परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के बाद जान गंवाने वाले मेडिकल परीक्षार्थियों के शोकाकुल परिजनों से व्यक्तिगत मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और मौजूदा शिक्षा प्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश के युवाओं को किसी की माफी या दया की जरूरत नहीं है, बल्कि सरकार का फर्ज है कि वह उनसे सच बोले और उन्हें इंसाफ दे।
राहुल गांधी ने इस मुलाकात का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए प्रधानमंत्री के बयानों पर पलटवार किया।
‘हर आंकड़े के पीछे एक टूटता सपना और परिवार है’
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में तमिलनाडु के तीन होनहार विद्यार्थियों—गोपिका, रोशनी और वेत्री आनंदन—का विशेष रूप से जिक्र किया, जिनकी जिंदगी नीट पेपर लीक और उसके बाद पैदा हुए अनिश्चितता के माहौल के चलते खत्म हो गई।
मुलाकात के मुख्य अंश और राहुल गांधी के प्रमुख बिंदु:
सिस्टम पर सवाल: राहुल गांधी ने कहा, "इन परिवारों से मिलने के बाद हर माता-पिता के मन में एक ही दर्दनाक सवाल था—एक ईमानदार और मेहनती विद्यार्थी को इस बेईमान सिस्टम की कीमत क्यों चुकानी पड़े?"
मानसिक दबाव और री-एग्जाम: पेपर लीक की वजह से परीक्षाएं रद्द हुईं और जबरन री-एग्जाम थोपा गया, जिसने युवाओं पर असहनीय मानसिक दबाव बनाया। यह एक ऐसा नुकसान है जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती।
पारदर्शी व्यवस्था का संकल्प: उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई एक ऐसी पारदर्शी शिक्षा प्रणाली के लिए है जहाँ मेहनत का सम्मान हो, परीक्षाएं निष्पक्ष हों और किसी भी छात्र को संस्थानों की नाकामी की वजह से अपनी जान न गंवानी पड़े।
‘माफी मांगने का फर्ज सरकार का है’
प्रधानमंत्री के बयानों का संदर्भ देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया कि जब देश का पूरा सिस्टम फेल हो जाए, तो जिम्मेदारी से भागा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत के होनहार छात्रों और उनके परिवारों की बात सुनने के बाद उनका यह विश्वास और गहरा हो गया है कि छात्रों को किसी से माफी की दरकार नहीं है, बल्कि निष्पक्ष जांच, सच की स्वीकारोक्ति और इंसाफ ही एकमात्र रास्ता है।





