नई दिल्ली
देश भर में परीक्षा प्रणालियों में धांधली और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पुलिसिया कार्रवाई के वीडियो फुटेज साझा करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों को "युवा विरोधी" करार दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करने की मांग की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी 10 प्रमुख और बड़ी बातें:
1. '10 सालों में 152 पेपर लीक, कोई सजा नहीं'
राहुल गांधी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में देश में 152 पेपर लीक की घटनाएँ हुई हैं, जिनसे लगभग 7.7 करोड़ छात्र और उनके परिवार सीधे प्रभावित हुए हैं। इसके बावजूद किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
2. 'नीट परीक्षा का खर्च देश के शिक्षा बजट के बराबर'
शिक्षा प्रणाली के व्यवसायीकरण पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि देश भर के छात्र मानसिक तनाव और आर्थिक दबाव में हैं। छात्र अकेले नीट (NEET) परीक्षा की तैयारी और प्रक्रियाओं पर लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं, जो देश के कुल शिक्षा बजट (लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये) के करीब है।
3. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने शिक्षा मंत्री को "भ्रष्ट और अक्षम" करार देते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की। राहुल गांधी ने कहा, "शिक्षा मंत्री पूरी तरह विफल रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की शिक्षा को कमजोर कर दिया गया है और देश के बच्चों का भविष्य दांव पर है।"
4. 'दुनिया का सबसे बेहतरीन सिस्टम अब धांधली का शिकार'
राहुल गांधी ने कहा कि कभी भारत की शिक्षा प्रणाली दुनिया की सबसे भरोसेमंद प्रणालियों में से एक मानी जाती थी। लेकिन वर्तमान सरकार के तहत एक सुनियोजित रणनीति के तहत इसे नुकसान पहुँचाया गया है और पूरे सिस्टम में अनियमिताएँ भर दी गई हैं।
5. छात्रों पर पुलिसिया बर्बरता की कड़ी निंदा
प्रदर्शनकारी छात्रों पर सुरक्षाबलों द्वारा बल प्रयोग और मारपीट की कड़ी आलोचना करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं के साथ देशद्रोहियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने शांतिपूर्ण छात्रों पर हमला करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की।
6. 'भारत के इतिहास की सबसे युवा विरोधी सरकार'
केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने इसे देश के इतिहास की सबसे "युवा विरोधी सरकार" करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज सुनने के बजाय शक्ति के बल पर उसे दबाने का प्रयास कर रही है।
7. छात्रों की मांगों का पूर्ण समर्थन
राहुल गांधी ने आंदोलनरत छात्रों की मांगों को पूरी तरह जायज ठहराया। उन्होंने कहा कि छात्र केवल एक निष्पक्ष, पारदर्शी और योग्यता पर आधारित शिक्षा व्यवस्था चाहते हैं, जो उनका बुनियादी अधिकार है।
8. प्रधानमंत्री से माफी और जवाबदेही की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने पूरे मामले पर जवाबदेही तय करने पर जोर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि वे आगे आएँ, प्रभावित युवाओं और छात्रों से माफी माँगें तथा देश के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाएँ।
9. पीएम आवास घेराव और विपक्ष के सड़क पर उतरने की वजह
पीएम आवास के बाहर हुए प्रदर्शन पर बोलते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट किया, "जब देश का छात्र सड़क पर है, तो विपक्ष का फर्ज बनता है कि वह भी उनका साथ दे।" उन्होंने बताया कि विपक्ष ने संसद में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए लोकसभा अध्यक्ष से गुहार लगाई थी, लेकिन विषय को नजरअंदाज किए जाने के बाद विपक्ष को सड़क पर उतरना पड़ा।
राहुल गांधी ने सरकार के सामने रखीं 3 प्रमुख माँगें
राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस का अंत केंद्र सरकार के समक्ष तीन स्पष्ट शर्तें/माँगें रखकर किया:
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत पद से हटाया जाए।
दोषी अधिकारियों पर सजा: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बर्बरता करने वाले पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
पीएम का खेद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे घटनाक्रम और छात्रों को हुई पीड़ा पर राष्ट्र के सामने खेद प्रकट करें।
"छात्र कोई आतंकवादी नहीं हैं, वे हमारे देश का भविष्य हैं। उनके साथ सरकार की यह बर्बरता और तानाशाही कतई स्वीकार्य नहीं है।"
— राहुल गांधी (नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा)





