संसद में 'डॉग' एंट्री पर घिरीं रेणुका चौधरी: 'अंदर बैठे लोग काटते हैं' वाली टिप्पणी पर विशेषाधिकार हनन का नोटिस, 23 फरवरी तक जवाब तलब

नई दिल्ली। कांग्रेस की फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद रेणुका चौधरी एक नए विवाद में फंस गई हैं। संसद परिसर में एक आवारा कुत्ते को अपनी कार में लाने और सांसदों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में उन्हें विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का नोटिस जारी किया गया है। राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति ने भाजपा सांसदों की शिकायत पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उनसे 23 फरवरी तक लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।

विवाद की जड़: क्या है पूरा मामला?

यह घटना पिछले साल शीतकालीन सत्र के दौरान 1 दिसंबर की बताई जा रही है। आरोप है कि रेणुका चौधरी एक घायल आवारा कुत्ते (रेस्क्यू डॉग) को अपनी कार में बिठाकर संसद के हाई-सिक्योरिटी ज़ोन के भीतर ले आईं। जब वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और कुछ सांसदों ने सुरक्षा नियमों का हवाला देते हुए इस पर आपत्ति जताई, तो सांसद ने कथित तौर पर एक विवादित बयान दे डाला।

"अंदर बैठे लोग काटते हैं, कुत्ते नहीं।"रेणुका चौधरी (कथित टिप्पणी)

भाजपा सांसदों का आरोप है कि यह टिप्पणी संसद की गरिमा को कम करने वाली और सभी निर्वाचित सदस्यों का अपमान है।

समिति की कार्रवाई और शिकायतकर्ता

भाजपा सांसद बृजलाल और इंदुबाला गोस्वामी ने नियम 188 के तहत राज्यसभा सभापति के पास आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि सांसद का आचरण न केवल सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उनकी भाषा संसदीय मर्यादाओं के प्रतिकूल है। सभापति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे विशेषाधिकार समिति को भेज दिया।

नोटिस की मुख्य बातें:

जवाब की अंतिम तिथि: 23 फरवरी 2026।

आधार: सुरक्षा नियमों का उल्लंघन और सांसदों के प्रति अपमानजनक शब्दों का प्रयोग।

प्रक्रिया: समिति रेणुका चौधरी के जवाब की समीक्षा करने के बाद तय करेगी कि क्या उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

रेणुका चौधरी का पक्ष: 'कानूनन अपराध नहीं'

सांसद के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, रेणुका चौधरी ने मानवीय आधार पर यह कदम उठाया था। उन्होंने रास्ते में एक घायल कुत्ते को देखा था और उसे प्राथमिक उपचार के लिए पशु चिकित्सक के पास ले जाना चाहती थीं। उनके समर्थकों का कहना है कि किसी बेजुबान की जान बचाना कोई अपराध नहीं है। नोटिस मिलने के बाद उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया में कहा कि वह संसदीय नियमों के तहत अपना पक्ष रखेंगी।

राजनीतिक गर्माहट

संसद परिसर में सुरक्षा एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है। भाजपा सांसदों का कहना है कि अगर इस तरह की हरकतों को नजरअंदाज किया गया, तो यह भविष्य के लिए गलत नजीर पेश करेगा। वहीं, विपक्षी खेमा इसे एक छोटी सी मानवीय घटना को राजनीतिक रंग देने की कोशिश बता रहा है।