मुंबई/नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अचानक दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं, जहाँ वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब हाल ही में संपन्न हुए जिला परिषद (ZP) और पंचायत समिति चुनावों के नतीजों के बाद गठबंधन के साथियों के बीच "समन्वय की कमी" के आरोप लग रहे हैं।

विवाद की जड़: जिला परिषद चुनाव परिणाम

फरवरी 2026 में हुए महाराष्ट्र के 12 जिला परिषद चुनावों में भाजपा ने 225 सीटों के साथ नंबर एक पार्टी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है। वहीं, शिंदे गुट (शिवसेना) को 162 सीटें और अजीत पवार गुट (NCP) को 165 सीटें मिली हैं।

नाराजगी के मुख्य कारण:

सत्ता से दूरी: शिंदे गुट के स्थानीय नेताओं का आरोप है कि कई जिलों में गठबंधन होने के बावजूद भाजपा उन्हें महत्वपूर्ण पदों (अध्यक्ष/उपाध्यक्ष) से दूर रख रही है।

रायगढ़ और फलटण का मामला: रायगढ़ में बहुमत के करीब होने के बावजूद शिवसेना को समझौता करना पड़ा, जबकि फलटण में भी पार्टी को दरकिनार किए जाने से स्थानीय कैडर में भारी आक्रोश है।

दलबदल का डर: इससे पहले नगर परिषद चुनावों के दौरान शिंदे गुट के कई पदाधिकारी भाजपा में शामिल हो गए थे, जिसे लेकर दोनों पार्टियों के बीच "एक-दूसरे के कार्यकर्ताओं को न तोड़ने" का समझौता हुआ था। अब शिंदे गुट को डर है कि वर्तमान असंतोष का फायदा उठाकर भाजपा फिर से उनके आधार में सेंध लगा सकती है।

बीएमसी (BMC) का 'मेयर' विवाद भी पृष्ठभूमि में

जनवरी 2026 में हुए बीएमसी (BMC) चुनावों के नतीजे भी इस तनाव की एक बड़ी वजह हैं। भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिंदे गुट को 29 सीटें मिलीं।

शिंदे गुट अब मुंबई के महापौर (Mayor) पद के लिए 'आधे-आधे कार्यकाल' (50-50 formula) की मांग पर अड़ गया है।

भाजपा, जो दशकों बाद मुंबई पर अकेले काबिज होने का सपना देख रही है, इस पद को छोड़ने के मूड में नहीं दिख रही है।

दिल्ली दौरे का एजेंडा: क्या निकलेगा समाधान?

बैठक का उद्देश्यसंभावित चर्चा के बिंदु
समन्वय (Coordination)जिला स्तर पर सत्ता की हिस्सेदारी का नया फॉर्मूला।
बीजेपी का बढ़ता कदगठबंधन में शिंदे गुट की "बड़े भाई" वाली छवि को बचाए रखना।
भविष्य की रणनीतिआगामी स्थानीय निकायों में टिकट बंटवारे और दलबदल रोकने पर स्पष्ट नीति।

राजनीतिक विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा का बढ़ता ग्राफ शिंदे गुट के लिए अस्तित्व का संकट पैदा कर रहा है। यदि दिल्ली दरबार में शिंदे अपनी शर्तों को मनवाने में विफल रहते हैं, तो राज्य सरकार के भीतर खींचतान और बढ़ सकती है, जिसका असर शासन और आने वाले बड़े फैसलों पर पड़ेगा।