कोलकाता | राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान प्रोटोकॉल को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक युद्ध में तब्दील हो गया है। भाजपा सांसद और बंगाल के चुनाव सह-प्रभारी बिप्लब कुमार देब ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए इसे राज्य की परंपराओं और देश की प्रथम नागरिक का अपमान करार दिया है।
"केवल मेयर को भेजना प्रोटोकॉल का उल्लंघन"
बिप्लब देब ने ममता सरकार की घेराबंदी करते हुए कहा कि जब देश की राष्ट्रपति और एक महिला शक्ति की प्रतीक राज्य के दौरे पर थीं, तो उनके स्वागत के लिए केवल शहर के मेयर को भेजना सरकार के संकीर्ण नजरिए को दर्शाता है।
"अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक एक दिन पहले देश की प्रथम नागरिक बंगाल आती हैं, लेकिन उनके स्वागत के लिए कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों या मुख्यमंत्री के बजाय केवल एक मेयर को भेजा जाता है। यह बंगाल की महान अतिथि देवो भव: की संस्कृति का सरासर अपमान है।"
मुलाकात का समय न मिलने पर तंज
यह विवाद तब और गहरा गया जब तृणमूल कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा था, जिसे राष्ट्रपति कार्यालय ने 'समय की कमी' का हवाला देते हुए ठुकरा दिया। इस पर कटाक्ष करते हुए देब ने कहा:
नैतिकता का सवाल: "तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के मुंह से राष्ट्रपति का नाम लेना भी शोभा नहीं देता।"
दोहरा मापदंड: भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार प्रोटोकॉल का पालन नहीं करती और दूसरी तरफ राष्ट्रपति से मुलाकात न मिलने पर शोर मचाती है।
बंगाल की गरिमा और राजनीति
बिप्लब देब ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और उनके स्वागत में की गई यह कोताही केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे देश के संवैधानिक गौरव का अनादर है। भाजपा इसे आने वाले चुनावों में बंगाल की अस्मिता और 'नारी शक्ति' के अपमान के मुद्दे के रूप में भुनाने की तैयारी में है।





