धनबाद।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत तीन दिवसीय प्रवास पर धनबाद में हैं।झारखंड राज्य के कार्यकर्ता राजमकल सरस्वती विद्या मंदिर में दस सितंबर से लेकर बारह सितंबर तक तीन दिवसीय बैठक में भाग ले रहे हैं।शताब्दी समारोह की तैयारी में जुटे संघ के लिए ये बैठक बहुत महत्वपूर्ण है। आपको बता दें कि 2025 में संघ की स्थानपना के सौ साल पूरे हो जाएंगे। 2024 तक देश के हर शहरी क्षेत्रों की बस्ती एवं ग्रामीण क्षेत्रों के गांव तक संघ ने शाखा और सामाजिक कार्य के जरिए अपनी पहुंच का लक्ष्य रखा है।संघ प्रमुख इसे हासिल करने के लिए लगातार दाैरे पर हैं और इसी क्रम में वो धनबाद में हैं।धनबाद की इस बैठक में झारखंड-बिहार क्षेत्र के तमाम बड़े पदाधिकारी और प्रमुख कार्यकर्ता माैजूद हैं।तीन दिवसीय बैठक के बीच में ही संघ प्रमुख का जन्मदिन भी है।इसे लेकर स्वयंसेवक उत्साहित हैं और ये बैठक महत्वपूर्ण बन गयी है।





आइए जाने सरकारी नाैकरी से लेकर संघ प्रमुख तक का सफर





बहुत कम लोगों को ज्ञात होगा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत शिक्षा ग्रहण करने के बाद कुछ दिनों तक सरकारी नाैकरी भी की हैं।संघ प्रमुख मोहन भागवत का जन्म 11 सितम्बर 1950 को महाराष्ट्र के चन्द्रपुर नाम के एक छोटे से नगर में हुआ था।इनका पूरा नाम मोहनराव मधुकरराव भागवत है। संघ प्रमुख के पिता का नाम मोहन मधुकरराव भागवत है और माता का नाम मालतीबाई है। मधुकरराव भागवत और मालतीबाई के तीन बेटे और एक बेटी हुई जिनमें से संघ प्रमुख सबसे बड़े हैं।संघ प्रमुख ने चन्द्रपुर के लोकमान्य तिलक विद्यालय से अपनी पूरी स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद वही चन्द्रपुर के जनता कॉलेज से बीएससी की भी शिक्षा प्राप्त की।संघ प्रमुख इसके बाद पंजाबराव कृषि विद्यापीठ अकोला से पशु चिकित्सा और पशुपालन में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। संघ प्रमुख ने पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी भी की है। महाराष्ट्र सरकार के एनिमल हसबेंडरी विभाग में बतौर वेटनरी ऑफिसर काम करने लगे और शुरुआत में पोस्टिंग चंद्रपुर में ही थी। एक स्वयंसेवक से सरसंघचालक तक संघ प्रमुख मोहन भागवत के सफर में परिवार से ही संघी बनने की प्रेरणा मिली है।संघ प्रमुख के दादा नारायण भागवत और पिता मधुकर भागवत का संघ से जुड़ाव रहा हैं।संघ प्रमुख के पिता मधुकर भागवत ने गुजरात में कुछ साल तक संघ के प्रचारक रहे।कहा जाता है कि संघ प्रमुख के पिता ही लालकृष्ण आडवाणी को संघ से जोड़ने की कड़ी बने थे।





आइए जाने पढ़ाई छोड़कर आरएसएस के क्यों बन गए प्रचारक





1974 में जब संघ प्रमुख मोहन भागवत पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए अकोला गए तभी कुछ दिनों बाद 1975 में देश में आपातकाल लगा दिया गया।ऐसे में संघ प्रमुख ने अपनी पढ़ाई को बीच ही में छोड़ दिया और संघ के प्रचारक बन गए। संघ प्रमुख के माता पिता को आपातकाल के दौरान जेल में डाल दिया गया और ऐसे में संघ प्रमुख आपातकाल के दौरान अज्ञातवास में रहे। संघ प्रमुख 1991 में आरएसएस के शारीरिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अखिल भारतीय प्रमुख बने और 1999 तक इसी पद पर रहे। 1999 में ही संघ प्रमुख मोहन भागवत को पूरे देश के संघ प्रचारकों का प्रमुख बनाया गया। 2000 में तत्कालीन संघ प्रमुख राजेन्द्र सिंह और तत्कालीन सरकार्यवाह एच. वी. शेषाद्री ने स्वास्थ्य कारणों की वजह से अपना पद छोड़ दिया और जिसके बाद एस सुदर्शन को संघ का नया प्रमुख और मोहन भागवत को सरकार्यवाह बनाया गया। 21 मार्च 2009 को एस सुदर्शन के पद छोड़ने के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत को संघ का सरसंघचालक बनाया गया।





संघ प्रमुख कार्यकर्ताओं के बीच मनाएंगे जन्मदिन





आज 11 सितंबर को संघ प्रमुख मोहन भागवत का जन्मदिन है।इस खास माैके पर संघ प्रमुख झारखंड और बिहार के कार्यकर्ताओं के बीच धनबाद में हैं। संघ प्रमुख शुक्रवार सुबह गंगा-दामोदार एक्सप्रेस से पटना से धनबाद पहुंचे।संघ प्रमुख का इसी कारण जन्मदिन बेहद खास बन गया है।संघ प्रमुख के जन्मदिन को लेकर संघ के पदाधिकारी से लेकर कार्यकर्ता तक बहुत उत्साहित हैं। संघ प्रमुख झारखंड राज्य कार्यकर्ता बैठक स्थल राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर में ही ठहरे हुए हैं।संघ प्रमुख को संघ के कार्यकर्ता जन्मदिन पर शुभकामनाएं दे रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ झरखंड राज्य के तीन दिवसीय कार्यकर्ता बैठक में झारखंड और बिहार राज्य के प्रमुख कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा हुआ है।इस बैठक में बिहार और झारखंड के क्षेत्र प्रचारक रामनवमी, क्षेत्र कार्यवाह मोहन सिंह, क्षेत्र संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर, अजय प्रसाद, झारखंड राज्य प्रमुख दिलीप, सह राज्य प्रमुख गोपाल, भाजपा के क्षेत्रीय संगठन प्रभारी नागेंद्र त्रिपाठी, झारखंड भाजपा के महामंत्री धर्मपाल,सभी जिलों के जिला प्रचारक, सभी अनुषंगी संगठन के प्रमुख आदि भाग ले रहे हैं।