मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताओं और चुनाव आयोग के आंतरिक फैसलों पर खड़े हुए गंभीर विवाद के बीच, देश की सियासत गरमा गई है। इंडी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर एक प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग' और 'मॉक संसद' कार्यक्रम का आयोजन किया। इस विशेष सत्र की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की।
यह पूरा घटनाक्रम रामलीला मैदान में विपक्ष की प्रस्तावित 'दिल्ली चलो' रैली से ठीक एक दिन पहले सामने आया है, जिसके जरिए विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को देशव्यापी स्तर पर पुरजोर तरीके से उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
लोकतंत्र की आत्मा पर प्रहार: मीरा कुमार
मॉक संसद की शुरुआत करते हुए पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसका अनुसरण एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका सहित पूरी दुनिया करती है। हमारे लोकतांत्रिक मॉडल के केंद्र में मतदाता की आत्मा बसती है।
उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, "यदि किसी एक मतदाता को भी वोट डालने के अधिकार से वंचित किया जाता है, तो यह हमारे लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा प्रहार है। किसी को भी उसके मताधिकार से रोकना हमारे लोकतांत्रिक ताने-बाने को भारी नुकसान पहुंचाता है।"
खरगे के तीखे तेवर: लगाए 6 गंभीर आरोप और रखीं 3 मांगें
कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग (ECI) ने रातों-रात एसआईआर (SIR) की घोषणा कर इसे पूरे देश में लागू कर दिया, जिसका मुख्य उद्देश्य बीजेपी के विरोधियों के वोट सूची से हटाना है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए घुसपैठियों और बाहरी लोगों का बहाना बना रही है, जबकि विपक्ष केवल असली और वैध मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की वकालत कर रहा है।
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खरगे द्वारा लगाए गए प्रमुख 6 आरोप:
- चुनाव चुराने की सोची-समझी साजिश रची गई।
- मतदाता सूची से 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।
- संसदीय निगरानी या जानकारी के बिना 'फॉर्म 6' को फिर से लिखा गया।
- ECINET के जरिए मतदाता सूचियों पर नियंत्रण कर लिया गया।
- अपने संवैधानिक दायित्व का उल्लंघन करते हुए बाकी दो चुनाव आयुक्तों को प्रक्रिया से बाहर रखा गया।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर कार्य किया गया।
विपक्ष की 3 बड़ी मांगें:
- मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को तत्काल पद से हटाया जाए।
- SIR प्रक्रिया को पूरी तरह रोका व समाप्त किया जाए।
- मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़े 2023 के विवादास्पद कानून में संशोधन कर बदलाव किया जाए।
खरगे ने आगे कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने संविधान लागू होते ही बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों को मताधिकार दिया, जिसका उस समय भी विरोध किया गया था। उन्होंने चुनावी बॉन्ड, सांसदों के निलंबन और नए कानूनों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सत्ता पर काबिज रहने के लिए हर संभव साजिश रची जा रही है।
नागरिक समाज की सक्रिय भागीदारी
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने इस आयोजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह कोई सामान्य या दिखावटी संसद नहीं है, बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का सार्वजनिक महाभियोग है। इसमें न केवल इंडी गठबंधन के नेता, बल्कि बड़ी संख्या में नागरिक समाज के सदस्य भी पूरी उत्सुकता के साथ शामिल हो रहे हैं।
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