बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में सत्ता हस्तांतरण (पावर शेयरिंग) का बड़ा फॉर्मूला आखिरकार जमीन पर उतर आया है। राज्य के दिग्गज नेता और अब तक उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर रहे डी.के. शिवकुमार (DKS) कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। शनिवार शाम विधान सौध (विधानमंडल) के कॉन्फ्रेंस हॉल में हुई कांग्रेस विधायक दल (CLP) की हाई-प्रोफाइल बैठक में डी.के. शिवकुमार को सर्वसम्मति से नया नेता चुन लिया गया है।

हाल ही में सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और राज्यपाल थावर चंद गहलोत द्वारा मंत्रिपरिषद को भंग किए जाने के बाद यह रास्ता साफ हुआ था। शिवकुमार का शपथ ग्रहण समारोह 3 जून को दोपहर 4:10 बजे एक विशेष 'शुभ मुहूर्त' में होना तय हुआ है।

विधान सौध नहीं, 'ग्लास हाउस' में होगा सादा शपथ ग्रहण

शपथ ग्रहण समारोह के स्थान को लेकर सस्पेंस अब खत्म हो चुका है। पहले चर्चा विधान सौध की भव्य सीढ़ियों या राजभवन की थी, लेकिन आम जनता को होने वाली असुविधा को देखते हुए अब यह समारोह बेंगलुरु के लोक भवन स्थित 'ग्लास हाउस' में आयोजित किया जाएगा। पार्टी आलाकमान की ओर से इस बार सादगी से शपथ ग्रहण करने का फैसला लिया गया है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई दिग्गज शामिल होंगे।

चुनाव से पहले राज्यपाल से मिले शिवकुमार

शनिवार दोपहर, विधायक दल का नेता चुने जाने से ठीक पहले, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने राजभवन जाकर राज्यपाल थावर चंद गहलोत से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल के रविवार को एक कार्यक्रम के सिलसिले में दक्षिण कन्नड़ जिले के धर्मस्थल जाने की संभावना है, जिसके चलते शिवकुमार ने शनिवार को ही नए मंत्रिमंडल और शपथ ग्रहण की तारीख को लेकर उनसे अनौपचारिक चर्चा पूरी कर ली।

नए मंत्रिमंडल के लिए दिल्ली से बेंगलुरु तक 'लॉबिंग' तेज

सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद से ही बेंगलुरु और दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल है:

मंत्रियों में धुकधुकी: शुक्रवार को दिल्ली में आलाकमान (के.सी. वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला) के साथ हुई बैठक के बाद से कई पुराने मंत्रियों की छुट्टी होने की अटकलें तेज हैं।

नए चेहरों की रेस: मंत्री पद की आस लगाए बैठे कई नए और युवा विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और अपनी दावेदारी पक्की करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। पहले चरण में 3 जून को शिवकुमार के साथ 8 से 10 मंत्री शपथ ले सकते हैं, जबकि बाकी विस्तार 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के बाद होगा।

एक से अधिक 'डिप्टी सीएम' का नया फॉर्मूला?

राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने के लिए इस बार कर्नाटक सरकार में एक से अधिक उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी एक दलित और एक अल्पसंख्यक (मुस्लिम) चेहरे को डिप्टी सीएम की कुर्सी सौंप सकती है, ताकि राज्य के सभी प्रमुख वोट बैंक को संतुष्ट रखा जा सके। हालांकि, इस फॉर्मूले पर अंतिम मुहर लगना अभी बाकी है।

सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार के बीच पिछले 3 साल से चले आ रहे इस 'पावर टसल' का फिलहाल पटाक्षेप हो गया है, और अब पूरा राज्य 3 जून को होने वाले 'कनकपुरा के संकटमोचक' डी.के. शिवकुमार के राजतिलक का इंतजार कर रहा है।