रायपुर।
छत्तीसगढ़ की सियासत में 'चरण पादुका योजना' को लेकर छिड़ा विवाद अब बेहद तल्ख मोड़ पर पहुंच गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर राज्य के कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने कड़ा पलटवार किया है। मंत्री ने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा है कि अगर उनके पास कोई सबूत हैं, तो वे सामने लाएं, सरकार इसकी विधिवत जांच कराने के लिए तैयार है।
दीपक बैज का नया और गंभीर आरोप: 'एमपी के बड़े नेता के रिश्तेदार को फायदा पहुंचाने का खेल'
राजधानी रायपुर में मीडिया से चर्चा के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने साय सरकार की नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि 2018 में कांग्रेस सरकार ने पारदर्शिता के लिए जूता बांटने के बजाय सीधे तेंदूपत्ता संग्राहकों के खातों में पैसे (DBT) भेजना शुरू किया था। लेकिन वर्तमान साय सरकार ने भ्रष्टाचार के उद्देश्य से फिर से जूता बांटना शुरू कर दिया है।
इस बार बैज ने एक नया और बड़ा दावा करते हुए आरोप लगाया:
"चरण पादुका योजना के अंतर्गत इस बार संग्राहकों को दिए जाने वाले जूतों के लिए 'सेफ्टी-शू' देने का टेंडर निकाला गया है। यह टेंडर मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ भाजपा नेता के रिश्तेदार को सीधा फायदा पहुंचाने के लिए सेट किया गया है।" — दीपक बैज, प्रदेश अध्यक्ष (छत्तीसगढ़ कांग्रेस)
मंत्री रामविचार नेताम का करारा पलटवार: 'हवा-हवाई बातें न करें बैज'
तेंदूपत्ता संग्राहकों की चरण पादुका योजना पर विपक्ष के इन तीखे हमलों पर वन एवं सहकारिता मंत्री रामविचार नेताम ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा:
"दीपक बैज के पास अगर इस कथित घोटाले के कोई भी पुख्ता सबूत हैं, तो वे उसे सार्वजनिक करें और हमें दिखाएं। सिर्फ हवा-हवाई बातें करने से कुछ हासिल नहीं होता। अगर शासन के संज्ञान में कोई भी ऐसी प्रामाणिक बात आती है, तो उसकी विधिवत जांच कराई जाएगी।" — रामविचार नेताम, कैबिनेट मंत्री (छत्तीसगढ़ सरकार)
"हर जगह दुखी दिखाई देते हैं कांग्रेसी"
इसके साथ ही मंत्री नेताम ने राज्य में बुधवार से लागू हो रही 'जीरामजी योजना' का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं की तकलीफें लगातार बढ़ती जा रही हैं और उनके दुख को मापने का कोई पैरामीटर नहीं है। कांग्रेसी हर विकास कार्य और जनहित की योजना में सिर्फ दुखी ही दिखाई देते हैं।
सियासी गलियारों में गर्माहट
विपक्ष द्वारा 'टेंडर फिक्सिंग' और 'नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद)' के आरोप लगाए जाने और सत्तापक्ष द्वारा खुली चुनौती दिए जाने के बाद, छत्तीसगढ़ की राजनीति में चरण पादुका योजना को लेकर आने वाले दिनों में जंग और तेज होने के आसार हैं।





