नई दिल्ली:
प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अपना अनशन समाप्त करने की इच्छा व्यक्त की है, लेकिन इसके लिए सरकार के सामने एक प्रमुख शर्त रखी है। केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को संबोधित इस पत्र में वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि वह अनशन तभी समाप्त करेंगे जब सरकार इस आंदोलन में शामिल युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न करने का लिखित आश्वासन दे।
"युवाओं की कीमत पर अनशन तोड़ना मंजूर नहीं"
अस्पताल में केंद्रीय मंत्रियों की यात्रा का उल्लेख करते हुए सोनम वांगचुक ने लिखा कि मंत्रियों ने उनसे स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की थी। साथ ही लगभग 65 सांसदों ने भी पत्र लिखकर उनसे जीवन रक्षा और देश सेवा में लौटने का आग्रह किया है।
पत्र के प्रमुख अंश:
"मैं जीना चाहता हूँ। मैं अपने छात्रों, शिक्षा और अपने काम की ओर लौटना चाहता हूँ। लेकिन मैं उन युवाओं की कीमत पर ऐसा नहीं कर सकता, जिनके लिए यह आंदोलन शुरू हुआ था। सरकार से सम्मानपूर्वक स्पष्ट आश्वासन चाहता हूँ कि निष्पक्ष व जवाबदेह शिक्षा प्रणाली के लिए आवाज उठाने वाले किसी भी युवा को कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।"
सोनम वांगचुक ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा आश्वासन नहीं मिलता है, तो वह अपना अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस द्वारा बल प्रयोग नहीं किया जाएगा।
सरकार से की गईं मुख्य माँगें
सोनम वांगचुक ने बातचीत के दौरान और पत्र के माध्यम से सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख बिंदु रखे हैं:
छात्र परिवारों को मुआवजा: पेपर लीक के कारण जान गँवाने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।
संसद में चर्चा व जवाबदेही: शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा हो, जिसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के पहलू पर भी विचार शामिल हो।
मुकदमों से संरक्षण: 20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च और आंदोलन से जुड़े युवाओं पर किसी भी तरह का उत्पीड़न या दंडात्मक मामला दर्ज न हो।
सीजेपी का 25वें दिन भी प्रदर्शन, दिल्ली मेट्रो सेवाएँ हुई बहाल
एक तरफ जहाँ सोनम वांगचुक के पत्र से गतिरोध सुलझने की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर जंतर-मंतर पर सीजेपी (CJP) का प्रदर्शन बुधवार (22 जुलाई) को 25वें दिन भी जारी रहा। संगठन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है।
| सुरक्षा एवं यातायात अपडेट | विवरण |
|---|---|
| सुरक्षा स्थिति | सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा कारणों से बुधवार सुबह दिल्ली मेट्रो के 16 प्रमुख स्टेशन (जैसे राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, मंडी हाउस आदि) बंद कर दिए गए थे। |
| जन-जीवन पर असर | सुबह के व्यस्त समय में मेट्रो स्टेशन बंद रहने से हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। |
| वर्तमान स्थिति | दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने 'X' (ट्विटर) पर पुष्टि की है कि स्थिति नियंत्रण में आने के बाद अब मेट्रो नेटवर्क के सभी स्टेशन यात्रियों के लिए पुनः खोल दिए गए हैं। |
"हमारे लोकतंत्र का भविष्य इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह उनसे कैसा व्यवहार करता है जो उनसे सहमत हैं, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि वह अपने युवा नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है जब वे साहस और उम्मीद के साथ बोलने की हिम्मत करते हैं।"
— सोनम वांगचुक





