चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में जबरदस्त 'ड्रामा' शुरू हो गया है। सरकार बनाने की जादुई संख्या (बहुमत) हासिल करने के लिए तमिलागा वेट्री कजगम (TVK) और AIADMK के बीच लुका-छिपी का खेल चल रहा है। इस बीच, तमिलनाडु की राजनीति का पुराना चेहरा रही 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' की वापसी हो गई है, जिससे सियासी तापमान सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

पुडुचेरी के रिजॉर्ट में 28 विधायक, बगावत की बू?

खबरों के मुताबिक, एआईएडीएमके (AIADMK) के वरिष्ठ नेता सीवी शनमुगम के समर्थक 28 विधायकों को पुडुचेरी के पूरानकुप्पम स्थित एक निजी रिजॉर्ट में शिफ्ट कर दिया गया है।

सौदा: चर्चा है कि टीवीके (TVK) इन विधायकों को अपने पाले में लाने के लिए डिप्टी चीफ मिनिस्टर पद और कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की पेशकश कर रही है।

किंगमेकर की भूमिका: सीवी शनमुगम और ओएस मणियन जैसे दिग्गज नेता गठबंधन सरकार में अहम हिस्सेदारी के पक्ष में हैं, जिससे पार्टी के भीतर बगावत के संकेत मिल रहे हैं।

एआईएडीएमके में गहरा विभाजन

पार्टी महासचिव एडप्पाडी पलानीस्वामी (EPS) ने टीवीके को समर्थन देने के किसी भी प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। लेकिन पार्टी के भीतर एक बड़ा गुट, जिसका नेतृत्व सीवी शनमुगम कर रहे हैं, सत्ता में भागीदारी चाहता है। इस आंतरिक कलह ने एआईएडीएमके की रणनीति को अधर में लटका दिया है।

बहुमत का गणित: 5 विधायकों की दरकार

थलापति विजय की पार्टी टीवीके सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े से वह अब भी 5 सीटें पीछे है।

मौजूदा स्थिति: कांग्रेस के 5 विधायकों ने विजय को समर्थन देने का भरोसा दिया है, लेकिन सरकार बनाने के लिए उन्हें अभी 5 और विधायकों के समर्थन की जरूरत है।

कानूनी सलाह: कुछ वरिष्ठ रणनीतिकार टीवीके को सुप्रीम कोर्ट जाने या दोबारा चुनाव कराने का सुझाव दे रहे हैं, ताकि गतिरोध खत्म हो सके।

राज्यपाल के पाले में गेंद

टीवीके प्रमुख विजय अब तक राज्यपाल से दो बार मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें सरकार बनाने का औपचारिक न्योता नहीं मिला है। राज्यपाल की भूमिका इस पूरे मामले में निर्णायक होने वाली है।

सियासी जानकारों का मानना है कि यदि टीवीके और एआईएडीएमके का बागी गुट हाथ मिलाता है, तो तमिलनाडु में दशकों पुरानी 'द्रविड़ राजनीति' के समीकरण हमेशा के लिए बदल जाएंगे। फिलहाल, सबकी नजरें पुडुचेरी के उस रिजॉर्ट पर टिकी हैं, जहाँ से तमिलनाडु की सत्ता का रास्ता तय होना है।