चेन्नई | विशेष संवाददाता तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजने से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन में दरार की आहट सुनाई दे रही है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) द्वारा कांग्रेस को सीट-बंटवारे पर अंतिम फैसला लेने के लिए दी गई समय सीमा आज (मंगलवार) समाप्त हो गई है। इसके बावजूद दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर गतिरोध बरकरार है, जिससे गठबंधन के भविष्य को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं।

35 सीटों की मांग और डीएमके की सख्ती

गठबंधन में पेंच मुख्य रूप से सीटों की संख्या पर फंसा है। सूत्रों के अनुसार, डीएमके और कांग्रेस के बीच मांगों का अंतर काफी बड़ा है:

कांग्रेस का रुख: कांग्रेस इस बार राज्य में अपनी बढ़ती सक्रियता का हवाला देते हुए कम से कम 35 सीटों की मांग कर रही है। पार्टी का मानना है कि उनकी संगठनात्मक मजबूती के आधार पर उन्हें 2021 के मुकाबले अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

डीएमके का फॉर्मूला: मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके पिछले चुनाव (2021) के फॉर्मूले पर अड़ी है। डीएमके ने कांग्रेस को 25 विधानसभा सीटें और साथ में एक राज्यसभा सीट देने का प्रस्ताव दिया है।

समय सीमा और चुनावी तैयारी

डीएमके नेतृत्व जल्द से जल्द सीटों का बंटवारा कर चुनावी अभियान में जुटना चाहता है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि गठबंधन में इस बार कुछ नए सहयोगी दल भी शामिल हुए हैं, जिनके लिए सीटें निकालना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में कांग्रेस का कोटा बढ़ाना डीएमके के लिए रणनीतिक रूप से मुश्किल साबित हो रहा है।

"डीएमके ने स्पष्ट कर दिया था कि वे अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकते। चुनाव प्रचार की योजना बनाने के लिए सीटों का स्पष्ट होना अनिवार्य है।" — पार्टी सूत्र

प्रमुख विवादित बिंदु: एक नजर में

विवरणडीएमके का प्रस्तावकांग्रेस की मांग
विधानसभा सीटें2535 (न्यूनतम 32 पर अड़ी)
अतिरिक्त लाभ1 राज्यसभा सीटअधिक विधानसभा सीटों पर जोर
तर्कनए सहयोगियों को जगह देना जरूरीबेहतर प्रदर्शन और संगठन का विस्तार

गठबंधन के भविष्य पर प्रश्नचिह्न

आज की समय सीमा समाप्त होने के साथ ही गेंद अब कांग्रेस आलाकमान के पाले में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस अपनी मांग पर अड़ी रहती है, तो पार्टी गठबंधन में अपनी भूमिका का पुनर्मूल्यांकन कर सकती है। वहीं, डीएमके भी यह संकेत दे रही है कि वह अपनी शर्तों पर बहुत अधिक झुकने को तैयार नहीं है।

क्या 'इंडिया' ब्लॉक के ये दो महत्वपूर्ण साथी तमिलनाडु में अपनी एकता बरकरार रख पाएंगे या राज्य को एक नया राजनीतिक समीकरण देखने को मिलेगा? अगले 24 घंटे इस सवाल का जवाब तय कर सकते हैं।