पटना। भोजपुर-बक्सर एमएलसी उपचुनाव में राजद (RJD) प्रत्याशी सोनू राय की शानदार जीत के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। इस जीत से उत्साहित राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए एक बार फिर 'बैलेट पेपर' (मतपत्र) से चुनाव कराने की मांग दोहराई है। तेजस्वी ने दावा किया कि यदि ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव हों, तो भारतीय जनता पार्टी और एनडीए गठबंधन का वजूद खतरे में पड़ जाएगा।
"यंत्र और षड्यंत्र से नहीं, जनतंत्र से हो चुनाव"
सोनू राय की जीत को कार्यकर्ताओं के संघर्ष की जीत बताते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि राजद शुरू से ही बैलेट पेपर का पक्षधर रहा है। उन्होंने पुराने चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए कहा:
पोस्टल बैलेट का तर्क: तेजस्वी के अनुसार, पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में पोस्टल बैलेट की गिनती में राजद गठबंधन 150 से अधिक सीटों पर आगे था, लेकिन "तंत्र, यंत्र और षड्यंत्र" के जरिए उन्हें पराजित कर दिया गया।
देर रात परिणाम पर सवाल: उन्होंने तर्क दिया कि यदि ईवीएम की मतगणना के परिणाम भी देर रात एक-दो बजे तक आते हैं, तो मतपत्रों की गिनती में लगने वाले समय को लेकर आपत्ति क्यों? लोकतंत्र में पारदर्शिता और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए बैलेट पेपर ही सबसे बेहतर विकल्प है।
उपचुनाव में राजद की 'पहली' संजीवनी
भोजपुर-बक्सर स्थानीय निकाय क्षेत्र का यह उपचुनाव राजद के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। मंगलवार को हुए मतदान के बाद बुधवार को आए नतीजों में राजद उम्मीदवार सोनू राय ने जदयू के कन्हैया प्रसाद को 359 मतों के अंतर से शिकस्त दी। विधानसभा चुनाव के बाद यह पहला मौका है जब किसी उपचुनाव में राजद ने जीत का स्वाद चखा है। इस जीत के बाद पटना स्थित राजद कार्यालय में जश्न का माहौल रहा।
पेपर लीक मामले पर सरकार की 'नीति और नीयत' को घेरा
चुनावी चर्चा के साथ-साथ तेजस्वी यादव ने हाल ही में रद्द हुई NEET-UG 2026 परीक्षा और लगातार हो रहे पेपर लीक को लेकर केंद्र व राज्य सरकार पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा:
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़: तेजस्वी ने दुख जताया कि 23 लाख छात्रों का भविष्य अंधकार में है। क्या भाजपा सरकार में एक परीक्षा भी बिना धांधली के कराने की योग्यता नहीं है?
आर्थिक और मानसिक बोझ: उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि क्या सरकार ने उस आर्थिक और मानसिक कष्ट का विश्लेषण किया है, जो छात्रों और उनके अभिभावकों को पुनर्परीक्षा के दौरान झेलना पड़ेगा।
जवाबदेही का अभाव: तेजस्वी ने आरोप लगाया कि सरकार का उद्देश्य केवल संस्थानों का प्रयोग विपक्ष के खिलाफ करना रह गया है, जबकि शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही शून्य हो चुकी है।
निष्कर्ष:
एमएलसी उपचुनाव की यह जीत राजद के लिए केवल एक सीट की वृद्धि नहीं, बल्कि आगामी चुनावों के लिए एक मनोवैज्ञानिक बढ़त भी है। तेजस्वी यादव ने इस मंच का उपयोग कर चुनावी शुचिता और युवाओं के भविष्य जैसे दो सबसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।





