चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में आज एक नया अध्याय लिखा गया। सुपरस्टार से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने विधानसभा में भारी बहुमत के साथ विश्वास मत हासिल कर लिया है। फ्लोर टेस्ट के दौरान सरकार के पक्ष में 144 वोट पड़े, जबकि विरोध में केवल 22 मत दर्ज किए गए।

विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने औपचारिक रूप से विजय सरकार की जीत की घोषणा की। इस महत्वपूर्ण सत्र के दौरान सदन में भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला, जहाँ एक ओर विपक्ष में बिखराव दिखा, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष ने विपक्षी खेमे में बड़ी सेंधमारी की।

सदन का समीकरण: कौन साथ, कौन खिलाफ?

मुख्यमंत्री विजय द्वारा विश्वास मत का प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई। सरकार को सुरक्षित बचाने में गठबंधन सहयोगियों और विपक्षी गुटों की बड़ी भूमिका रही:

समर्थन में: कांग्रेस, सीपीआई (CPI), सीपीआई-एम (CPI-M), वीसीके (VCK), आईयूएमएल (IUML) और एएमएमके (AMMK) ने सरकार का पुरजोर समर्थन किया।

विरोध में: एआईएडीएमके (AIADMK) के पलानीस्वामी गुट ने सरकार के खिलाफ मतदान किया।

वॉकआउट: मुख्य विपक्षी दल डीएमके (DMK) ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट किया और मतदान प्रक्रिया से दूरी बनाए रखी।

तटस्थ: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने एकमात्र विधायक के साथ 'तटस्थ' रहने का फैसला किया, जबकि पीएमके (PMK) ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

AIADMK में बड़ी बगावत

इस फ्लोर टेस्ट की सबसे बड़ी खबर एआईएडीएमके में हुई टूट रही। पार्टी के वरिष्ठ नेता एस.पी. वेलुमणि और सी.वी. षणमुगम के नेतृत्व में लगभग 30 विधायकों ने अपनी ही पार्टी के जनरल सेक्रेटरी के. पलानीस्वामी के आदेशों को दरकिनार करते हुए विजय सरकार को समर्थन दिया।

हालाँकि, पलानीस्वामी गुट ने बागी विधायकों को चेतावनी दी है कि व्हिप का उल्लंघन करने पर उन पर दलबदल विरोधी कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आंकड़ों की ज़ुबानी

श्रेणीसंख्या / विवरण
कुल समर्थन144 विधायक
विरोध में वोट22 विधायक
TVK के विधायक107 (स्पीकर सहित)
गैर-मौजूद05 विधायक

विशेष नोट: टीवीके के तिरुपत्तूर विधायक आर. श्रीनिवासन सेतुपति हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले के कारण अपना वोट नहीं डाल सके।

विजय की पहली बड़ी परीक्षा सफल

सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री विजय के लिए यह 'अग्निपरीक्षा' मानी जा रही थी। 107 विधायकों वाली टीवीके को बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुँचाने के लिए कांग्रेस के 5 विधायकों और वामपंथी दलों के बाहरी समर्थन ने संजीवनी का काम किया।

डीएमके के वॉकआउट और एआईएडीएमके के आंतरिक कलह ने विजय की राह को और भी आसान बना दिया। इस जीत के साथ ही तमिलनाडु में अब TVK युग की नींव और मजबूत हो गई है।