चेन्नई | 4 मई, 2026 सिनेमा के पर्दे पर 'विजय' नाम का किरदार अक्सर अन्याय के खिलाफ इंकलाब लाता है, लेकिन 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव परिणामों ने इस फिल्मी पटकथा को हकीकत में तब्दील कर दिया है। सुपरस्टार थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने राज्य की सियासत में वह करिश्मा कर दिखाया है, जिसकी कल्पना दशकों से जमी-जमाई पार्टियों DMK और AIADMK ने कभी नहीं की थी। विजय ने एम.के. स्टालिन को सत्ता से बेदखल कर तमिलनाडु की राजनीति में एक नए सूर्योदय की घोषणा कर दी है।

दिग्गजों की विफलता और विजय का दांव

तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा का रिश्ता पुराना है, लेकिन एमजीआर और जयललिता के बाद कोई भी सितारा सत्ता के शिखर तक नहीं पहुँच सका था। जहाँ रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गज राजनीति और सिनेमा के बीच संतुलन नहीं बना पाए, वहीं विजय ने राजनीति में उतरने से पहले सुनहरे पर्दे को पूरी तरह 'बाय-बाय' कहकर अपनी गंभीरता सिद्ध की। उनकी यह 'फुल-टाइम' राजनीतिक प्रतिबद्धता ही जनता के बीच भरोसे का कारण बनी।

मुफ्त सुविधाओं का पिटारा या भविष्य का ब्लूप्रिंट?

विजय ने 'द्रविड़ियन' राजनीति की पुरानी परंपरा यानी 'मुफ्त की रेवड़ियों' को एक नए और आधुनिक कलेवर में पेश किया। उनके घोषणापत्र ने न केवल गरीबों बल्कि मध्यम वर्ग और युवाओं को भी अपनी ओर खींचा:

महिलाओं के लिए: ₹2500 मासिक भत्ता, 6 गैस सिलेंडर फ्री, और शादी के लिए 8 ग्राम सोना।

युवाओं के लिए: 5 लाख सरकारी नौकरियां, ₹4000 बेरोजगारी भत्ता और AI यूनिवर्सिटी/सिटी की स्थापना।

स्वास्थ्य एवं कृषि: ₹25 लाख का स्वास्थ्य बीमा और किसानों का 50% कर्ज माफ।

आरक्षण: स्थानीय नौकरियों में तमिलनाडु के युवाओं के लिए 75% आरक्षण का वादा।

भावुक अपील: "वोट नहीं, परिवार का सदस्य चुनें"

विजय ने अपने प्रचार के दौरान किसी दल से गठबंधन न कर 'तीसरे विकल्प' की हुंकार भरी। उन्होंने हर समुदाय, किसान, मछुआरे और बुनकर से संवाद किया। उनकी सबसे प्रभावी अपील रही— "TVK को वोट देना मतलब अपने परिवार के सदस्य को सत्ता में बिठाना है, जो आपकी फिक्र करेगा।" 52 साल के विजय, जिनके पिता ईसाई और माँ हिंदू हैं, ने अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि और सादगी से हर घर में पैठ बनाई।

सत्ता से सिनेमा तक का सफर

तमिलनाडु की राजनीति में एमजीआर, करुणानिधि और जयललिता जैसी शख्सियतों का जो प्रभाव रहा है, विजय अब उसी विरासत के उत्तराधिकारी बनकर उभरे हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो पर्दे का नायक प्रदेश का नायक भी बन सकता है।

निष्कर्ष: अब पूरी दुनिया की नज़रें थलपति विजय पर हैं। चुनौती केवल चुनाव जीतना नहीं थी, बल्कि अब उन भव्य वादों को धरातल पर उतारना है जिनसे तमिलनाडु की जनता को एक नए सुनहरे भविष्य की उम्मीद है।