पटना/तिरुवनंतपुरम | भारतीय राजनीति के रंग निराले हैं, और इसका सबसे ताज़ा उदाहरण केरल विधानसभा चुनावों में देखने को मिल रहा है। बिहार में जहाँ कांग्रेस और वामपंथी दल (Left) आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन के छोटे हिस्सेदार हैं, वहीं केरल में आरजेडी ने लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के साथ हाथ मिलाकर कांग्रेस के खिलाफ ताल ठोकने का फैसला किया है।
तेजस्वी का बड़ा ऐलान: LDF के सारथी बनेंगे
आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को स्पष्ट कर दिया कि केरल में उनकी पार्टी सत्तारूढ़ LDF के सहयोगी के तौर पर चुनाव लड़ेगी। दिलचस्प बात यह है कि इस फैसले के बाद तेजस्वी केरल में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के खिलाफ प्रचार करते नजर आएंगे।
बिहार vs केरल: विरोधाभासों की राजनीति
केरल का सियासी समीकरण बिहार से बिल्कुल उलट है, जिसे समझना जरूरी है:
| राज्य | आरजेडी की भूमिका | कांग्रेस और लेफ्ट का समीकरण |
|---|---|---|
| बिहार | बड़े भाई की भूमिका (नेतृत्व) | आरजेडी के साथ मिलकर महागठबंधन का हिस्सा। |
| केरल | छोटी सहयोगी पार्टी | कांग्रेस (UDF) और लेफ्ट (LDF) कट्टर प्रतिद्वंद्वी हैं। |
तेजस्वी यादव ने राज्यसभा चुनाव की वोटिंग से ठीक पहले यह घोषणा करते हुए कहा, "हमें उम्मीद है कि हम केरल में LDF को सत्ता में बनाए रखने में पूरी मदद करेंगे।"
चुनाव की महत्वपूर्ण तारीखें
चुनाव आयोग ने केरल विधानसभा चुनाव के लिए बिगुल फूंक दिया है। राज्य की सभी सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है:
मतदान (Voting): 9 अप्रैल (एक ही चरण में)
नतीजे (Results): 4 मई
क्या आरजेडी खोल पाएगी खाता?
आरजेडी ने 2021 के पिछले केरल विधानसभा चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन तब उसे कोई खास सफलता नहीं मिली थी। इस बार पार्टी को उम्मीद है कि एंटी-इंकम्बेंसी और वामपंथियों के मजबूत कैडर के साथ मिलकर वह अपनी उपस्थिति दर्ज करा पाएगी। वहीं, बीजेपी नीत एनडीए (NDA) भी दक्षिण के इस दुर्ग में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।





