चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी (AAP) के सबसे युवा और चर्चित चेहरों में से एक, राघव चड्ढा ने आधिकारिक तौर पर भाजपा का दामन थाम लिया है। उनके साथ छह अन्य सांसदों के इस्तीफे ने राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। अपने इस बड़े फैसले पर चुप्पी तोड़ते हुए चड्ढा ने एक वीडियो संदेश जारी किया है, जिसमें उन्होंने पार्टी के भीतर के दमघोंटू माहौल और 'टॉक्सिक वर्क कल्चर' का खुलासा किया है।

"पार्टी अब भ्रष्ट लोगों के हाथ में है"

इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक भावुक वीडियो में राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने अपने युवावस्था के 15 बहुमूल्य साल इस पार्टी को सींचने में लगाए थे। उन्होंने कहा:

"राजनीति में आने से पहले मैं एक सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) था। मैं करियर बनाने नहीं, बल्कि देश सेवा के लिए आया था। लेकिन आज यह पार्टी वैसी नहीं रही जैसी शुरुआत में थी। यह अब चंद भ्रष्ट लोगों के हाथ की कठपुतली बन गई है जो देश हित के बजाय निजी फायदों को प्राथमिकता दे रहे हैं।"

टॉक्सिक वर्क कल्चर का लगाया आरोप

चड्ढा ने पार्टी छोड़ने के पीछे काम करने की आजादी न होने को मुख्य कारण बताया। उन्होंने कार्यस्थल की तुलना एक दफ्तर से करते हुए कहा कि जब वर्कप्लेस 'टॉक्सिक' (विषाक्त) हो जाए, तो वहां काम करना असंभव हो जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें संसद में बोलने और जनहित के मुद्दों पर काम करने से लगातार रोका जा रहा था।

तीन विकल्प और सात सांसदों का सामूहिक फैसला

राघव ने बताया कि उनके पास केवल तीन रास्ते बचे थे: राजनीति छोड़ना, पार्टी में रहकर सुधार की (असफल) कोशिश करना, या फिर एक नई शुरुआत करना। उन्होंने सामूहिक इस्तीफे का बचाव करते हुए कहा:

सामूहिक इस्तीफा: चड्ढा के साथ अशोक मित्तल, संदीप पाठक, स्वाति मालिवाल, हरभजन सिंह और राजेंद्र गुप्ता जैसे दिग्गजों ने भी भाजपा का हाथ थामा है।

तर्क: "एक या दो लोग गलत हो सकते हैं, लेकिन सात अनुभवी सांसद और अनगिनत शिक्षित कार्यकर्ता एक साथ गलत नहीं हो सकते।"

"अब मुद्दों का समाधान भी होगा"

जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे संसद और सार्वजनिक जीवन में आम लोगों की आवाज पहले की तरह ही उठाते रहेंगे। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि अब उनके पास न केवल सवाल उठाने की शक्ति है, बल्कि सत्ता पक्ष के साथ जुड़कर उन समस्याओं का ठोस समाधान निकालने की क्षमता भी होगी।

आप (AAP) के लिए बड़ा झटका

एक साथ सात सांसदों का टूटना आम आदमी पार्टी के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट माना जा रहा है। विशेषकर राघव चड्ढा जैसे संस्थापक सदस्य का जाना पार्टी की आंतरिक एकता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।