कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के शोर के बीच कांग्रेस के रणनीतिक गलियारों से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। चुनावी रणभूमि में आक्रामक रुख अपनाने के बजाय, कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए 'सॉफ्ट अप्रोच' अपना लिया है। राज्य की सभी 294 सीटों पर उम्मीदवार उतारने के बावजूद, पार्टी का असल ध्यान केवल 60 सीटों तक ही सिमट कर रह गया है।

निशाने पर 'भगवा', टीएमसी पर केवल औपचारिकता

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह 'यू-टर्न' बीजेपी को रोकने की एक बड़ी कवायद है। राहुल गांधी की रैलियों और संदेशों में यह बदलाव साफ नजर आता है। हालिया सभाओं में उनके भाषणों का 75% हिस्सा भाजपा पर प्रहार करने में बीता, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर हमले केवल एक औपचारिक औपचारिकता तक सीमित रहे।

यहाँ तक कि मतदान के दिन राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के संदेशों में भी ममता बनर्जी के प्रति नरमी और भाजपा के प्रति तीखे तेवर दिखाई दिए। दिलचस्प बात यह है कि अक्सर आक्रामक रहने वाली ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने भी राहुल के आरोपों को तवज्जो न देते हुए अपना पूरा ध्यान भाजपा को घेरने में ही लगाया है।

बर्फ पिघलने के पीछे के समीकरण

इस बदली हुई फिजा के पीछे महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे राष्ट्रीय मुद्दों को प्रमुख माना जा रहा है। संसद में इन विषयों पर कांग्रेस का साथ मिलने के बाद से ममता बनर्जी और कांग्रेस नेतृत्व के बीच जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है। हालांकि, 'इंडिया' गठबंधन के साथी होने के बावजूद दोनों दल और लेफ्ट फ्रंट बंगाल में अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन मैदान पर 'रणनीतिक सामंजस्य' की गूंज सुनाई दे रही है।

प्रचार अभियान में सुस्ती या सोची-समझी चाल?

कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है:

राहुल गांधी: पहले चरण में केवल एक दिन (14 अप्रैल) प्रचार किया। दूसरे चरण के लिए भी मात्र एक दिन (25 अप्रैल) का कार्यक्रम तय है।

प्रियंका गांधी: अब तक पूरे बंगाल अभियान से दूरी बनाए हुए हैं और भविष्य के लिए भी फिलहाल कोई कार्यक्रम तय नहीं है।

फोकस: पार्टी की पूरी ताकत उन 60 सीटों पर केंद्रित है जहाँ उसका पारंपरिक जनाधार मजबूत रहा है।

विशेषज्ञों की राय: जानकार इसे 'फ्रेंडली फाइट' से एक कदम आगे की रणनीति मान रहे हैं। बंगाल में गठबंधन भले ही कागजों पर न हो, लेकिन सियासी बयानों की नरमी इशारा कर रही है कि चुनाव बाद के समीकरणों के लिए दरवाजे अभी से खुले रखे गए हैं।