पटना | मुख्य संवाददाता बिहार की सियासत में मंगलवार को एक बड़े ऐतिहासिक बदलाव पर मुहर लग गई। जनता दल (यूनाइटेड) के दिग्गज नेता नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद खाली हो रहे मुख्यमंत्री पद की कमान अब सम्राट चौधरी संभालेंगे। बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में उनके नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। शपथ ग्रहण समारोह कल, यानी 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे पटना स्थित लोकभवन में आयोजित किया जाएगा।

दो उप-मुख्यमंत्रियों के साथ नई सरकार

सूत्रों के अनुसार, सम्राट चौधरी के साथ दो उपमुख्यमंत्री भी शपथ लेंगे। इसमें सबसे चौंकाने वाला और चर्चित नाम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का है, जिनका राजनीति में यह पहला बड़ा औपचारिक प्रवेश होगा। उनके साथ अनुभवी नेता विजय चौधरी को भी डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी दी जा सकती है। सोमवार को राज्यपाल के सचिव ने सम्राट चौधरी से मुलाकात कर समारोह की तैयारियों और संभावित मंत्रियों की सूची पर विस्तृत चर्चा की।

राजनीतिक सफर: लालू की 'पाठशाला' से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक

16 नवंबर 1968 को जन्मे सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के कद्दावर समाजवादी नेता रहे हैं।

शुरुआत: सम्राट ने राजनीति का 'क, ख, ग' राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और लालू प्रसाद यादव के सानिध्य में सीखा।

बदलाव: बाद में वे जदयू में शामिल हुए और जीतन राम मांझी की सरकार में मंत्री रहे। अंततः उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामा, जहाँ उनकी आक्रामक कार्यशैली ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया।

कर्पूरी ठाकुर के बाद रचा नया इतिहास

सम्राट चौधरी बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। इसी के साथ उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक मिथक भी तोड़ दिया है। बिहार के इतिहास में जननायक कर्पूरी ठाकुर के बाद सम्राट चौधरी दूसरे ऐसे नेता बन गए हैं, जो पहले उपमुख्यमंत्री रहे और बाद में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचे।

अनुग्रह नारायण सिंह से लेकर सुशील मोदी और तेजस्वी यादव जैसे दिग्गज नेता इस रिकॉर्ड को छूने में सफल नहीं हो सके थे, जिसे सम्राट ने आज सच कर दिखाया है।

प्रमुख जानकारी एक नजर में:

शपथ ग्रहण: 15 अप्रैल, सुबह 11:00 बजे (लोकभवन)।

नए मुख्यमंत्री: सम्राट चौधरी।

संभावित डिप्टी सीएम: निशांत कुमार और विजय चौधरी।

विरासत: दिग्गज नेता शकुनी चौधरी के पुत्र और पूर्व डिप्टी सीएम।

नीतीश कुमार के राष्ट्रीय राजनीति में जाने और सम्राट चौधरी के राजतिलक के साथ ही बिहार की सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। अब देखना यह होगा कि सम्राट चौधरी की यह नई 'टीम' राज्य की विकास दर और राजनीतिक स्थिरता को किस दिशा में ले जाती है।