कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) को लेकर दिए गए एक ताजा बयान ने राज्य में नए राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे सुरक्षा बलों के खिलाफ 'हेट स्पीच' करार देते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा हमला बोला है।

ममता बनर्जी का विवादित बयान: "अयोध्या से आ रहे हैं 200 ट्रक"

एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या से सुरक्षा बलों की भारी तैनाती बंगाल की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा:

"मैंने सुना है कि अयोध्या से सीआरपीएफ की 200 गाड़ियां आप पर हमला करने के लिए आ रही हैं, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। यह सिर्फ 15-20 दिन का खेल है, उसके बाद उन्हें असली खेल समझ आ जाएगा।"

भाजपा का पलटवार: "हिंसा भड़काने की साजिश"

ममता बनर्जी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोमवार को एक कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने TMC का नया नामकरण करते हुए इसे 'BBC' यानी 'भड़काऊ भाईजान कमेटी' बताया।

शहजाद पूनावाला के मुख्य आरोप:

सुरक्षा बलों पर निशाना: पूनावाला ने कहा कि ममता बनर्जी पहले भी लोगों को CISF और CRPF पर बर्तनों से हमला करने के लिए उकसा चुकी हैं। अब वह फिर से सुरक्षा बलों के खिलाफ नफरत फैलाकर हिंसा भड़काना चाहती हैं।

संस्थानों का अपमान: भाजपा प्रवक्ता ने याद दिलाया कि इससे पहले टीएमसी नेताओं ने चुनाव आयोग के "हाथ-पैर तोड़ने" और "उंगली काटने" जैसे बयान दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मालदा में न्यायिक अधिकारियों पर हुआ हमला इसी तरह की बयानबाजी का नतीजा था।

हार का डर: पूनावाला ने तंज कसते हुए कहा, "चूंकि ममता बनर्जी चुनाव हार रही हैं, इसलिए वह संवैधानिक संस्थाओं, ईडी, सीबीआई और अब सेना के जवानों को निशाना बना रही हैं।"

राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल

भाजपा ने इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी आड़े हाथों लिया। पूनावाला ने सवाल किया कि खुद को संविधान रक्षक बताने वाले राहुल गांधी मालदा में जजों पर हुए हमले और सीआरपीएफ के खिलाफ दी जा रही 'हेट स्पीच' पर चुप क्यों हैं?

सुरक्षा की चिंता और अदालती दखल

यह विवाद ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही बंगाल में केंद्रीय बलों की तैनाती को बरकरार रखने का आदेश दे चुका है। अदालत ने न्यायिक अधिकारियों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कर्मियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। भाजपा का कहना है कि टीएमसी का यह रवैया न केवल सुरक्षा बलों के लिए खतरा पैदा कर रहा है, बल्कि लोकतांत्रिक ढांचे को भी चुनौती दे रहा है।