नई दिल्ली/पटना: देश की राजधानी दिल्ली में बिहार के एक युवक की हत्या ने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। खगड़िया निवासी 23 वर्षीय जोमैटो डिलीवरी बॉय, पांडव कुमार की दिल्ली पुलिस के एक जवान द्वारा गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र और दिल्ली सरकार पर तीखा हमला बोला है। तेजस्वी ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि वर्तमान सरकार के दौर में "बिहारी होना ही सबसे बड़ा अपराध और देशद्रोह" बन गया है।
"बीजेपी बिहारियों के लिए काल बन चुकी है"
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए भाजपा के नेतृत्व वाली 'डबल इंजन' सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि दिल्ली की कानून-व्यवस्था सीधे केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के अधीन है, फिर भी एक निर्दोष बिहारी को केवल उसकी पहचान के कारण मौत के घाट उतार दिया गया।
तेजस्वी यादव के प्रहार के मुख्य बिंदु:
सब कुछ भाजपा का, फिर भी असुरक्षित बिहारी: तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा कि दिल्ली में पार्षद, विधायक, सांसद, एलजी, गृह मंत्री और प्रधानमंत्री सब भाजपा के हैं, फिर भी बिहारी असुरक्षित हैं।
पलायन का दंश: उन्होंने नीतीश कुमार और भाजपा की 21 साल की नीतियों को कोसा, जिसके कारण बिहार के युवा पलायन कर दूसरे राज्यों में अपमान और नफरत झेलने को मजबूर हैं।
चुप्पी पर सवाल: तेजस्वी ने सवाल उठाया कि बिहार के एनडीए नेता अब अपनी "मांद" में क्यों दुबके हुए हैं और पीड़ित को न्याय दिलाने की हिम्मत क्यों नहीं दिखा रहे।
क्या है पूरा मामला?
यह हृदयविदारक घटना शनिवार रात दिल्ली के जाफराकलां थाना क्षेत्र के रावता गांव की है।
नशे में धुत पुलिसकर्मी: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में तैनात हेड कांस्टेबल नीरज ने कथित तौर पर शराब के नशे में पांडव कुमार (23) को गोली मार दी।
मौत और घायल: पांडव की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका दोस्त कृष्णा गोली लगने से गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में जीवन-मौत के बीच जूझ रहा है।
विवाद की वजह: आरोप है कि मृतक को केवल 'बिहारी' होने के कारण निशाना बनाया गया।
न्याय और मुआवजे की मांग
तेजस्वी यादव ने सरकार से स्पष्ट मांग की है कि:
हत्यारे पुलिसकर्मी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए और उसे सख्त सजा दिलाई जाए।
पीड़ित परिवार को तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए।
बिहार और बिहारियों के सम्मान पर हुए इस आघात के लिए सरकार जवाबदेही तय करे।
निष्कर्ष: यह घटना न केवल दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाती है, बल्कि आने वाले समय में बिहार और दिल्ली की राजनीति में 'बिहारी अस्मिता' के मुद्दे को और गरमा सकती है। तेजस्वी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर चुप बैठने वाले नहीं हैं और तत्काल न्याय की मांग करते हैं।





