नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को राज्यसभा का माहौल उस समय बेहद गर्म हो गया, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा सदन में गूंजा। इस विषय पर विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

खरगे का हमला: "हमलावर आजाद क्यों? अधिकारियों पर हो कार्रवाई"

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित पुलिस अत्याचार का मुद्दा उठाते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। खरगे ने कहा, "जिन लोगों ने छात्रों पर हमला किया वे आजाद घूम रहे हैं। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।"

खरगे ने सवाल उठाते हुए पूछा, "मैं आपसे गुजारिश करता हूं कि जो लोग बिना इजाजत वहां गए, उन्हें सजा मिलनी चाहिए। वे वहां क्यों गए? वे कौन हैं? उन्हें किसने भेजा और किसने आदेश दिया? मैं पूछ रहा हूं कि वे कौन हैं... उन्हें वहां जाने के लिए किसने कहा?"

विपक्ष के सदस्यों ने सदन में नारेबाजी की और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मुद्दे पर आधिकारिक बयान देने और कार्रवाई का आदेश देने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाने की मांग की।

जे.पी. नड्डा का पलटवार: "छात्र राजनीति में यह सामान्य, इमरजेंसी में मुझे भी मिली थी गिरफ्तारी"

विपक्ष की मांगों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने केवल सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून के मुताबिक कदम उठाया है।

सदन को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा, "यह कानून-व्यवस्था की एक बहुत ही सामान्य स्थिति थी जिसे हमें समझना होगा। पुलिस ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमानुसार कार्रवाई की। जो भी छात्र एक्टिविज्म से जुड़ा है, उसे इस प्रकार की स्थितियों का सामना करना ही पड़ता है।"

विपक्ष पर इस घटना को बेवजह तूल देने और सनसनी फैलाने का आरोप लगाते हुए नड्डा ने अपने छात्र जीवन के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा, "मेरे दोस्त जॉन ब्रिटास ने जो कुछ भी कहा है, उसके बावजूद यह एक सामान्य मामला है। मैं खुद एक छात्र कार्यकर्ता रहा हूं। कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल (इमरजेंसी) के दौरान छात्र आंदोलन में शामिल होने की वजह से मुझे कई बार क्लासरूम से गिरफ्तार किया गया था।"

मानसून सत्र में इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना रहा और सदन में काफी देर तक हंगामा देखने को मिला।