नई दिल्ली: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि यह विधेयक अर्धसैनिक बलों (CRPF, BSF, ITBP, CISF) के लाखों जवानों के मनोबल को तोड़ने वाला और उनके अधिकारों का हनन करने वाला है।

राहुल गांधी की 'गारंटी': "सत्ता में आए तो रद्द करेंगे बिल"

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक वीडियो साझा करते हुए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि यदि आगामी आम चुनाव में कांग्रेस सत्ता में आती है, तो इस "भेदभावपूर्ण" विधेयक को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा।

अजय मलिक का उदाहरण: राहुल गांधी ने सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक का जिक्र किया, जिन्होंने एक नक्सली मुठभेड़ में अपना पैर खो दिया था। उन्होंने कहा:

"15 साल की निष्ठापूर्ण सेवा और सर्वोच्च बलिदान के बावजूद ऐसे अफसरों को प्रमोशन नहीं मिलता और न ही अपनी फोर्स को लीड करने का अधिकार। क्योंकि शीर्ष पद केवल आईपीएस (IPS) अफसरों के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं।"

विवाद की मुख्य वजह: IPS प्रतिनियुक्ति (Deputation)

विपक्ष और कैडर अधिकारियों के विरोध का मुख्य कारण विधेयक के कुछ विशिष्ट प्रावधान हैं:

शीर्ष पदों पर आरक्षण: विधेयक के अनुसार, स्पेशल डायरेक्टर जनरल (SDG) और डायरेक्टर जनरल (DG) के सभी पद केवल आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित रहेंगे।

प्रमोशन में बाधा: आईजी (IG) रैंक के 50% और एडीजी (ADG) के 67% पदों पर भी आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति होगी।

कैडर का तर्क: अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों का तर्क है कि जो जवान 30-35 साल बल में बिताता है, उसे अपने ही संगठन का नेतृत्व करने का अवसर मिलना चाहिए।

"सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट रही सरकार"

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस कानून के जरिए सर्वोच्च न्यायालय के उस ऐतिहासिक फैसले को पलट रही है, जिसमें CAPF अधिकारियों को 'ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस' (OGAS) का दर्जा दिया गया था। कोर्ट ने सुझाव दिया था कि आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए ताकि कैडर अधिकारियों की पदोन्नति के रास्ते खुल सकें।

सरकार का पक्ष: "बेहतर समन्वय के लिए जरूरी"

दूसरी ओर, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और सत्तापक्ष के सांसदों का कहना है कि:

यह बिल सभी अर्धसैनिक बलों के लिए एक 'छाता ढांचा' (Umbrella Structure) तैयार करेगा।

अलग-अलग बलों के सेवा नियमों में मौजूद विसंगतियों को दूर किया जाएगा।

आईपीएस अधिकारियों की उपस्थिति से राज्य पुलिस और प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय (Coordination) स्थापित होता है।

संसद में स्थिति

राहुल गांधी ने यह भी शिकायत की कि सरकार ने उन्हें इस बिल पर बोलने का पर्याप्त समय नहीं दिया और उनके असम दौरे के दौरान इसे जल्दबाजी में लाया गया। फिलहाल लोकसभा में इस पर बहस जारी है और सरकार के पास बहुमत होने के कारण इसके यहाँ से भी पारित होने की पूरी संभावना है।

निष्कर्ष: यह विधेयक केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। जहाँ सरकार इसे 'सुधार' कह रही है, वहीं विपक्ष इसे 'जवानों का अपमान' बताकर आगामी चुनावों के लिए एक बड़ा हथियार बनाने की तैयारी में है।