नई दिल्ली।
देश की सियासी सरगर्मियों के बीच विपक्षी एकजुटता का एक बड़ा और औपचारिक चेहरा सामने आया है। कांग्रेस सहित 24 विपक्षी दलों और एक निर्दलीय सांसद ने देश की चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक संयुक्त पत्र लिखा है। कांग्रेस ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश के चुनावी लोकतंत्र को मौजूदा मोदी-शाह सरकार से सबसे गंभीर खतरा है। विपक्ष ने न्यायपालिका से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
"जब न्यायपालिका विफल होती है, तो गणतंत्र टूट जाता है"
मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र में विपक्षी नेताओं ने बेहद गंभीर और कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है। पत्र के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
संस्थागत विफलता पर चिंता: नेताओं ने कहा कि जब संस्थागत व्यवस्थाएं विफल हो जाती हैं, तो लोकतंत्र अराजकता में बदल जाता है। यदि ऐसे समय में न्यायपालिका भी विफल हो जाए, तो यह गणतंत्र के पूरी तरह से टूटने का संकेत होता है।
SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग: विपक्ष ने मांग की है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की वर्तमान प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए। इसे केवल उसी समय शुरू किया जाना चाहिए, जब अगले विधानसभा चुनाव में कम से कम पांच साल का समय शेष हो।
मतपत्रों (Ballot Papers) की वापसी: पत्र में केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाते हुए यह भी सुझाव दिया गया है कि जहाँ आवश्यक हो, वहाँ चुनाव के लिए मतपत्रों को फिर से शुरू करने पर गंभीरता से विचार किया जाए।
"कार्यपालिका की मनमानी से लोकतंत्र को बचाए कोर्ट" — केसी वेणुगोपाल
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर इस संयुक्त पत्र को साझा करते हुए न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा:
"यह हमारी न्यायपालिका की जिम्मेदारी है कि वह लोकतंत्र को कार्यपालिका की मनमानी से बचाए, खासकर तब जब सरकार उस सांविधानिक ढांचे को ही खत्म करने पर आमादा हो जिससे हमें हमारा लोकतंत्र मिला है। सुप्रीम कोर्ट को अन्याय को रोकने की जिम्मेदारी दी गई है।"
वेणुगोपाल ने आगे कहा कि देश के 1.4 अरब मतदाताओं के भरोसे को बहाल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को चुनाव प्रक्रिया की अखंडता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त और जरूरी कदम उठाने होंगे।
विपक्ष की एकजुटता का नया मील का पत्थर
इस संयुक्त कदम को विपक्षी गठबंधन के लिए एक बड़ी रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने इस पर टिप्पणी करते हुए 'एक्स' पर लिखा:
"यह एक बेहद अहम मोड़ है। इंडिया (INDIA) ब्लॉक की पांच बैठकों के बाद यह पहली बार है, जब भाजपा विरोधी दलों ने संयुक्त रूप से किसी एक साझा पत्र या दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं।"
अदालतें ही जनता की आखिरी उम्मीद
विपक्षी नेताओं ने साफ किया कि वे न्यायपालिका की साख या उसकी नीयत पर कोई सवाल नहीं उठा रहे हैं। लेकिन उनका मानना है कि जब कार्यपालिका और चुनाव आयोग जैसी अन्य महत्वपूर्ण संस्थाएं अपनी निष्पक्षता खोने लगें, तो देश की जनता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अदालतें ही आखिरी उम्मीद बचती हैं। विपक्षी दलों के इस साझा मोर्चे और सुप्रीम कोर्ट से लगाई गई इस गुहार ने आने वाले दिनों में चुनावी सुधारों और ईवीएम बनाम मतपत्र की बहस को एक बार फिर देश के केंद्र में ला खड़ा किया है।





