नई दिल्ली:

संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में गुरुवार (30 जुलाई) को 'पेपर लीक' रोकने वाले विधेयक पर जारी बहस के दौरान उस समय तीखा हंगामा देखने को मिला, जब राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने अचानक 'मनुस्मृति' का मुद्दा उठा दिया। सत्ता पक्ष (बीजेपी) के सांसदों ने खरगे की इस टिप्पणी पर जोरदार विरोध दर्ज कराया, जिससे सदन की कार्यवाही में भारी गहमागहमी उत्पन्न हो गई।

बहस के दौरान हस्तक्षेप करते हुए उपसभापति/सभापति ने खरगे को टोकते हुए सवाल उठाया कि आखिर 'मनुस्मृति' का पेपर लीक विरोधी विधेयक से क्या संबंध है?

खरगे ने क्या कहा, जिस पर भड़का सत्ता पक्ष?

विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने शिक्षा व्यवस्था और नए पाठ्यक्रम का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि नए सिलेबस में मनुस्मृति की बातें शामिल की जा रही हैं।

अपने वक्तव्य में खरगे ने कहा, "मनुस्मृति जैसे ग्रंथों में लिखा गया है कि यदि कोई (पिछड़े वर्ग/जाति का व्यक्ति) वेद का उच्चारण करे तो उसकी जीभ काट दी जानी चाहिए और वेद मंत्र धारण करने पर शरीर को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई है। इसे पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना अनुचित है।" खरगे के इस बयान के आते ही सत्ता पक्ष के सांसद खड़े हो गए और जमकर नारेबाजी करने लगे।

जेपी नड्डा का पलटवार: "टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाया जाए"

सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भारतीय जनता पार्टी की ओर से मोर्चा संभालते हुए खरगे के दावों को सिरे से खारिज किया। नड्डा ने सभापति से मांग की कि खरगे की इन असंवेदनशील टिप्पणियों को सदन के आधिकारिक रिकॉर्ड से तुरंत हटाया (Expunge) जाए, क्योंकि इससे समाज में वैमनस्य और अशांति फैल सकती है।

जेपी नड्डा ने कहा:

तथ्यों का प्रमाणीकरण: "मैं खरगे जी से अनुरोध करता हूं कि वे जो दावे कर रहे हैं, उन्हें मूल धार्मिक पाठ या संदर्भ के साथ सदन के पटल पर प्रमाणित करें।"

ऐतिहासिक संदर्भ: नड्डा ने स्पष्ट किया कि 'मनुस्मृति' (मनु के विचार) प्राचीन काल का एक ग्रंथ है जिसकी लिंग और जाति आधारित प्रावधानों के लिए पहले भी आलोचना होती रही है, लेकिन इसे इस तरह राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाकर तोड़-मरोड़कर पेश करना गलत है।

सियासी पृष्ठभूमि

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस और विपक्षी दल लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी पर यह राजनीतिक आरोप लगाते रहे हैं कि वे देश में भारतीय संविधान के स्थान पर मनुस्मृति की विचारधारा को लागू करने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, बीजेपी ने इसे हमेशा बेबुनियाद बताकर खारिज किया है। राज्यसभा में पेपर लीक जैसे महत्वपूर्ण विधेयक पर जारी चर्चा के दौरान इस मुद्दे के उठने से राजनीतिक गरमाहट और बढ़ गई है।