नई दिल्ली/मुंबई। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) में मची बड़ी फूट के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस राजनीतिक उठापटक के बीच अब कांग्रेस और विपक्ष ने सत्तारूढ़ दल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने सोमवार को भाजपा और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले खेमे द्वारा चलाए जा रहे 'ऑपरेशन टाइगर' को आड़े हाथों लेते हुए इसे 'ऑपरेशन कीचड़' करार दिया है।

पवन खेड़ा का हमला: "वे 240 पर क्यों रुक गए, क्या इरादा संविधान बदलना है?"

महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) के भीतर हुई इस बड़ी सेंधमारी पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने तीखा तंज कसा है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा:

"यह 'ऑपरेशन टाइगर' नहीं बल्कि 'ऑपरेशन कीचड़' है, क्योंकि इन सीटों पर सीधे तौर पर कमल नहीं खिल सका। लेकिन हमारा बुनियादी सवाल यह है कि सत्तापक्ष के लोग इतने परेशान क्यों हैं? वे लोकसभा में 240 सीटों पर ही क्यों रुक गए, उन्हें 400 सीटें क्यों नहीं मिलीं?"

खेड़ा ने आगे गंभीर आरोप लगाते हुए पूछा, "अब वे TMC और शिवसेना जैसी दूसरी क्षेत्रीय पार्टियों से सांसदों को तोड़ने में क्यों लगे हैं? इस डकैती के पीछे का असली मकसद क्या है? क्या वे वाकई अन्य दलों को खत्म करके देश का संविधान बदलना चाहते हैं?"

उद्धव ठाकरे को दूसरा बड़ा झटका: 9 में से 6 सांसदों ने बदला पाला

कांग्रेस की यह तीखी प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब शिवसेना (UBT) को महाराष्ट्र में अब तक का दूसरा सबसे बड़ा झटका लगा है। उद्धव गुट के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले खेमे में शामिल होने और सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) सरकार को समर्थन देने का बड़ा फैसला कर लिया है।

इस राजनीतिक विलय और मजबूती के बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का भी बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि "महाराष्ट्र में अब सिर्फ एक ही असली शिवसेना है और उसके सर्वेसर्वा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे हैं।"

महाराष्ट्र से पहले बंगाल में ममता बनर्जी को लगा था महाझटका

उल्लेखनीय है कि विपक्ष को तोड़ने का यह सिलसिला सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे को लगे इस तगड़े झटके से ठीक पहले पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा था।

पश्चिम बंगाल में टीएमसी को मिली चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष चरम पर पहुंच गया था। इसी का नतीजा रहा कि टीएमसी के 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया और काकोली दस्तीदार के नेतृत्व में त्रिपुरा की एक क्षेत्रीय पार्टी 'एनसीपीआई' (NCPI) में अपना विलय कर लिया। इस दोहरे झटके ने विपक्षी गठबंधन (INDIA) के सामने अपनी बची हुई साख और कुनबे को बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।