देहरादून। आगामी अप्रैल माह में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रस्तावित मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उत्तराखंड में चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाते हुए 15 मार्च को देहरादून में एक महाबैठक बुलाई है। इस बैठक में न केवल राज्य का शीर्ष नेतृत्व, बल्कि प्रदेश के सभी विधायक और प्रमुख पदाधिकारी भी शामिल होंगे।

बैठक का एजेंडा: 'बूथ जीता, तो चुनाव जीता'

बैठक का मुख्य उद्देश्य एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पार्टी की भूमिका को जमीन पर उतारना है। भाजपा इसे महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मतदाताओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करने और अपने बूथ तंत्र को परखने के अवसर के रूप में देख रही है।

रणनीति: बूथ स्तर पर नियुक्त बीएलए-1 और बीएलए-2 (बूथ लेवल एजेंट) की कार्यप्रणाली को धार देना।

संगठन विस्तार: पुनरीक्षण के माध्यम से नए मतदाताओं, विशेषकर युवाओं और प्रवासी मतदाताओं तक पहुंच बनाना।

शीर्ष उपस्थिति: बैठक में प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम, सह प्रभारी रेखा वर्मा और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के साथ केंद्रीय नेतृत्व के किसी बड़े चेहरे के शामिल होने की संभावना है।

निर्वाचन आयोग की तैयारी: 82% मैपिंग पूरी

जहाँ एक ओर राजनीतिक दल सक्रिय हैं, वहीं निर्वाचन आयोग भी एसआईआर को लेकर मुस्तैद है। ताजा जानकारी के अनुसार:

बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की मैपिंग का 82 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है।

अगले चरण में घर-घर जाकर सत्यापन और मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

भाजपा की 'किलेबंदी': तैनात हुए बूथ एजेंट

पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर इस प्रक्रिया को मिशन मोड में लिया है। भाजपा ने प्रत्येक बूथ पर अपने एजेंटों की नियुक्ति पहले ही कर दी है। इन एजेंटों का कार्य यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम न छूटे और मतदाता सूची पूरी तरह अपडेट रहे।

पार्टी का नजरिया: भाजपा नेतृत्व का मानना है कि यदि संगठन का तंत्र बूथ स्तर पर सक्रिय रहा, तो आने वाले चुनावी मुकाबलों में पार्टी को मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक बढ़त मिलना तय है।