नई दिल्ली:

देश की दो दशक पुरानी महत्वाकांक्षी ग्रामीण रोजगार योजना 'मनरेगा' (MGNREGA) के खात्मे और उसकी जगह 1 जुलाई से लागू होने जा रहे नए कानून को लेकर सियासी पारा गरमा गया है। कांग्रेस ने रविवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि 'विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम' यानी वीबी जी-राम जी अधिनियम (VB G-RAM G Act) राज्यों पर केवल वित्तीय बोझ और अत्यधिक केंद्रीकरण की गारंटी बनेगा।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि खुद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों समेत देश के कई सूबों ने इस नई योजना को लेकर गंभीर चिंताएं और विरोध दर्ज कराया है।

"तुच्छ और प्रतिशोधी राजनीति का नतीजा"

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए सरकार की विधायी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:

"हमेशा की तरह 'प्रतिशोधी और तुच्छ' राजनीति से प्रेरित मोदी सरकार ने ग्रामीण विकास संबंधी संसदीय स्थायी समिति, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित पक्षों से बिना किसी गहन परामर्श के मनरेगा को समाप्त करने का विधेयक संसद से जबरन पारित करा दिया।"

भाजपा शासित राज्यों ने भी खोला मोर्चा?

कांग्रेस नेता ने एक चार्ट साझा करते हुए दावा किया कि इस योजना को लेकर सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि सरकार के अपने सहयोगी और भाजपा शासित राज्य भी असहज हैं:

वित्तीय बोझ का विरोध: मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने नई व्यवस्था के तहत राज्यों पर डाले जाने वाले भारी अतिरिक्त वित्तीय बोझ का कड़ा विरोध किया है। उल्लेखनीय है कि ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह राज्य मध्य प्रदेश ने भी इस पर चिंता जताई है।

'ब्लैकआउट अवधि' पर आपत्ति: चार राज्य सरकारों ने खेती के व्यस्त सीजन के दौरान योजना में प्रस्तावित 'ब्लैकआउट अवधि' (जिस दौरान काम उपलब्ध नहीं कराया जाएगा) का विरोध किया है।

मजदूरी बढ़ाने की मांग: कम से कम पांच राज्यों ने ग्रामीण श्रमिकों की मौजूदा मजदूरी दर को बढ़ाने की मांग उठाई है।

कांग्रेस का आरोप: "काम के अधिकार पर चार हमले"

कांग्रेस ने 'एक्स' पर एक चार्ट साझा कर नए कानून के जरिए मोदी सरकार पर चार मोर्चों पर हमला करने का आरोप लगाया है:

क्रमहमलाकांग्रेस का तर्क
1.काम के अधिकार परमनरेगा ने संविधान से प्राप्त काम के अधिकार की कानूनी गारंटी दी थी, जिसे कमजोर किया जा रहा है।
2.उचित मजदूरी के अधिकार परयह नया कानून ग्रामीण श्रमिकों की सौदेबाजी (Bargaining Power) की शक्ति को कम करेगा।
3.पंचायती राज व्यवस्था परयोजना के अत्यधिक केंद्रीकरण से स्थानीय पंचायतों के अधिकार सीमित हो जाएंगे।
4.राज्यों की वित्तीय स्थिति परकेंद्र की इस महत्वाकांक्षी योजना के कारण राज्यों की तिजोरी पर अत्यधिक वित्तीय दबाव बढ़ेगा।

क्या है नया 'VB G-RAM G' अधिनियम?

केंद्र सरकार की घोषणा के अनुसार, 1 जुलाई से पूरे देश में लागू होने जा रहा 'वीबी जी-राम जी अधिनियम' लगभग 20 साल पुराने मनरेगा का स्थान लेगा।

इस नए ढांचे के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों की वैधानिक मजदूरी पर आधारित रोजगार की गारंटी देने का प्रावधान किया गया है। जहां सरकार इसे ग्रामीण विकास और रोजगार का एक नया व आधुनिक चरण मान रही है, वहीं विपक्ष और कई राज्यों के विरोध ने इसके जमीनी क्रियान्वयन पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।