कोलकाता/पुरसुरा:

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के बाद अब पश्चिम बंगाल के आलू किसानों के लिए भी राहत की बड़ी खबर सामने आ रही है। बीते सीजन में बंपर पैदावार होने के बावजूद फसल का वाजिब दाम न मिल पाने और आर्थिक नुकसान झेलने वाले किसानों को संबल देने के लिए सरकार ने विशेष मुआवजा पैकेज तैयार किया है। इस राहत पैकेज की औपचारिक घोषणा 5 नवंबर को हुगली जिले के पुरसुरा से की जाएगी। इस फैसले से विशेषकर राज्य के दक्षिणी जिलों के उन लाखों किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो पिछली फसल के दौरान भारी घाटे का शिकार हुए थे।

5 नवंबर को हुगली के पुरसुरा से होगी औपचारिक घोषणा

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने प्रभावित किसानों की मदद के लिए राहत पैकेज तैयार किए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पिछली फसल में नुकसान उठाने वाले किसानों को आर्थिक सहायता देने के लिए इस योजना का खाका तैयार किया गया है, जिसकी विस्तृत जानकारी 5 नवंबर के कार्यक्रम में साझा की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व सितंबर माह में सरकार द्वारा आलू किसानों को 2 रुपये प्रति किलो की दर से सब्सिडी देने की घोषणा की गई थी। इस योजना के तहत दिवाली से पहले पात्र किसानों के बैंक खातों में सीधी सहायता राशि अंतरित की जानी थी, जिसमें कुछ किसानों को लाखों रुपये तक की मदद मिलने की बात सामने आई थी। नए राहत पैकेज में मुआवजे की दर, दायरा और पात्रता से जुड़ी सभी शर्तें 5 नवंबर को ही पूरी तरह स्पष्ट होंगी।

अंतरराज्यीय आपूर्ति पर लगी पाबंदी बनी थी आर्थिक नुकसान का कारण

पश्चिम बंगाल भारत के प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों में अग्रणी स्थान रखता है। यहाँ उत्पादित आलू की आपूर्ति देश के विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर की जाती है। परंतु वर्ष 2025 में राज्य से बाहर आलू के परिवहन पर लगाई गई पाबंदियों के कारण किसानों और व्यापारियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। दूसरे राज्यों के बाजारों तक पहुँच रुकने से स्थानीय स्तर पर कीमतें गिर गईं, जिससे किसानों को अपनी उपज कौड़ियों के भाव बेचनी पड़ी।

'आलू से लदे ट्रकों को अब कोई नहीं रोकेगा' – मुख्यमंत्री का बड़ा आश्वासन

किसानों की दीर्घकालिक समस्याओं के समाधान हेतु मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आश्वासन दिया है कि राज्य में बीजेपी सरकार के कार्यकाल के दौरान आलू से लदे ट्रकों की

अंतरराज्यीय आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा।

विभिन्न राज्यों में मांग और बाजार मूल्यों में अंतर होता है; ऐसे में अंतरराज्यीय परिवहन की स्वतंत्रता से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नए और बेहतर बाजारों का विकल्प मिलेगा, जिससे उन्हें अपनी फसल का उचित और प्रतिस्पर्धी मूल्य हासिल हो सकेगा।

हुगली और पूर्व बर्धमान के किसानों में जगी नई उम्मीद

पश्चिम बंगाल का हुगली और पूर्व बर्धमान जिला आलू उत्पादन के प्रमुख गढ़ माने जाते हैं। पिछले सीजन में बिक्री और परिवहन संबंधी पाबंदियों का सबसे प्रतिकूल प्रभाव इन्हीं क्षेत्रों के कृषक समुदाय पर पड़ा था। 5 नवंबर को होने वाली घोषणा से इन जिलों के किसानों में नई उम्मीद जगी है। हालांकि, राहत योजना में किन-किन जिलों को शामिल किया जाएगा, मुआवजे का निर्धारण किस प्रकार होगा और आवेदन की क्या प्रक्रिया रहेगी, इन सभी प्रश्नों का पटाक्षेप आधिकारिक घोषणा के बाद ही होगा।

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