तेहरान / वाशिंगटन।

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी ठिकानों को निशाना बनाने वाले बयान के बाद ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। ईरानी सेना ने दोटूक शब्दों में कहा है कि यदि अमेरिका के साथ कोई नया संघर्ष छिड़ता है, तो वह पिछली लड़ाइयों की तुलना में कहीं अधिक लंबा और विनाशकारी होगा।

कहां से शुरू हुआ ताजा विवाद?

विवाद की सुई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस हालिया बयान से घूमी, जिसमें उन्होंने ईरान के कुछ बचे हुए सैन्य ठिकानों को तेजी से निशाना बनाने की बात कही थी।

  • ट्रंप का बयान: पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने दावा किया था, "हमें अभी भी एक या दो ठिकानों को संभालना बाकी है और हम इसे 10 मिनट के अंदर अंजाम दे सकते हैं।" इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से 'पिकएक्स माउंटेन' का जिक्र किया और कहा कि अमेरिका इसे बहुत जल्द निशाना बना सकता है।
  • नेतन्याहू से चर्चा: मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप ने शनिवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर लंबी चर्चा की थी। नेतन्याहू चाहते थे कि अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों के तुरंत बाद ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू की जाए, जबकि ट्रंप कूटनीतिक बातचीत को थोड़ा और मौका देने के पक्ष में नजर आए।

ईरान का आक्रामक पलटवार और कड़े तेवर

ट्रंप की धमकी के बाद ईरान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने तीखी प्रतिक्रिया दी है:

  • सेना का बयान: ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमिनिया ने सरकारी टेलीविजन पर कहा, "भविष्य में होने वाला कोई भी युद्ध पिछली लड़ाई से कहीं अधिक लंबा खिंचेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति इस स्थिति में बिल्कुल नहीं होंगे कि वे अपनी मर्जी से युद्ध की शर्तें या समय तय कर सकें।"
  • रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की चेतावनी: रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खमेनेई के संदेश का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ संघर्ष की कोई भौगोलिक सीमा नहीं है और दुश्मन को नुकसान पहुंचाने के लिए एक बहुत बड़ा दायरा तय किया गया है।
  • विदेश मंत्री का रुख: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया कि उनका देश बचाव और कूटनीति दोनों विकल्पों के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन समझदारी इसी में है कि दूसरा पक्ष कूटनीति का रास्ता चुने।

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जे.डी. वेंस की चिट्ठी और ईरान की 4 सख्त शर्तें

तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल भी तेज है। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई ने खुलासा किया कि उन्हें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस का एक पत्र मिला है, जिसमें औपचारिक बातचीत दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया है।

हालांकि, ईरान ने इसे अमेरिका के रुख में बदलाव माना है, लेकिन साथ ही स्पष्ट कर दिया है कि जब तक तेहरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक कोई बात नहीं होगी। ईरान ने बातचीत और वैश्विक ऊर्जा मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को फिर से खोलने के लिए चार प्रमुख शर्तें रखी हैं:

  1. संपत्तियों की वापसी: विदेशों में जब्त (फ्रीज) की गई तमाम ईरानी संपत्तियों को तत्काल मुक्त किया जाए।
  2. नाकेबंदी समाप्त: ईरानी बंदरगाहों पर महीनों से जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
  3. प्रतिबंध हटाना: ईरान पर लगाए गए सभी पुराने आर्थिक प्रतिबंधों को तुरंत हटाया जाए।
  4. सैन्य हमले बंद: इस क्षेत्र के सभी मोर्चों पर जारी सैन्य हमलों को फौरन रोका जाए।

खाड़ी देशों की चिंताएं और आम जनता का हाल

  • खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया: इस बढ़ते तनाव पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गर्गाश ने कहा कि UAE को उम्मीद है कि इन वार्ताओं से कोई बड़ा समाधान निकलेगा, लेकिन वे सबसे बुरे हालात के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं।
  • आम जनता में बेचैनी: तेहरान के आम नागरिकों में युद्ध के खतरे को लेकर गहरी चिंता है। 27 वर्षीय हेल्थ इंस्पेक्टर मोहदेसे ने न्यूज एजेंसी एएफपी से बातचीत में कहा, "जो खबरें आ रही हैं, वे सचमुच चिंताजनक हैं, लेकिन... मैं असल में इसके बारे में कुछ नहीं कर सकती, हम खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।"

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