बर्लिन: यूरोपीय देश जर्मनी में युवाओं के नेतृत्व में आयोजित राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के दौरान भारी हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आई हैं, जिसकी देश के तमाम शीर्ष राजनेताओं ने कड़ी निंदा की है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस बात पर भी सहमति जताई जा रही है कि कुछ उपद्रवियों की वजह से युवाओं की जायज और बुनियादी मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

शनिवार को 'GenZ regelt!' नामक समूह के आह्वान पर हजारों की संख्या में युवा जर्मनी की सड़कों पर उतरे थे। इन प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें जीवनयापन की बढ़ती लागत (Cost of Living), शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाने और बजट में की जा रही कटौतियों पर रोक लगाने से जुड़ी थीं। उल्लेखनीय है कि युवाओं का यह आंदोलन हाल ही में फ्रांस और इटली में हुए इसी तरह के विरोध प्रदर्शनों की तर्ज पर शुरू हुआ था।

बर्लिन, फ्रैंकफर्ट और कोलोन बने हिंसा का केंद्र

शुरुआत में शांतिपूर्ण बताए जा रहे इन प्रदर्शनों ने जल्द ही उग्र रूप ले लिया। फ्रैंकफर्ट शहर में नकाबपोश उपद्रवियों ने कई दुकानों में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ और लूटपाट की। इसके अलावा राजधानी बर्लिन, कोलोन और हैम्बर्ग जैसे प्रमुख शहरों में भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं।

कुछ स्थानों पर उग्र प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पेट्रोल बम फेंके, जिसके जवाब में भीड़ को नियंत्रित करने और तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को वाटर कैनन (Water Cannons) का भारी इस्तेमाल करना पड़ा। हेस्से राज्य के प्रीमियर बोरिस राइन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा कि इस तरह की हिंसक घटनाएं पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं।

इसे भी पढ़ेंः फ्रांस में उग्र प्रदर्शन: सड़कों पर उतरे 3.20 लाख लोग, मैक्रों सरकार पर बढ़ा आर्थिक संकट

जर्मन गृह मंत्री और राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रियाएं

इस हिंसा के बाद जर्मनी की राजनीति में भूचाल आ गया है। देश के गृह मंत्री अलेक्जेंडर डोब्रिंड्ट ने इस व्यापक हिंसा के लिए वामपंथी उग्रवादी गुटों और प्रवासी समुदायों के उपद्रवियों को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह स्थिति फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुई पिछली हिंसक घटनाओं जितनी भयावह नहीं थी।

  • दक्षिणपंथी पार्टी AfD: इस पार्टी ने भी हिंसा के पीछे वामपंथी चरमपंथ और अनियंत्रित प्रवासन (Uncontrolled Migration) को मुख्य कारण बताया है।
  • वामपंथी पार्टी 'डाई लिंके' (Die Linke): पार्टी की प्रमुख इनेस श्वर्डटनर ने कहा कि कुछ उपद्रवियों द्वारा की गई तोड़फोड़ की वजह से हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की मांगें खारिज नहीं की जानी चाहिए।
  • ग्रीन्स पार्टी: सह-प्रमुख फ्रांजिस्का ब्रांटनर का मानना है कि हिंसा ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हजारों युवाओं के जायज मकसद और उनकी आवाज को भारी नुकसान पहुंचाया है।

आगे की चेतावनी: 14 नवंबर को फिर से बड़े प्रदर्शन का आह्वान

हिंसा और प्रशासनिक सख्ती के बावजूद 'GenZ regelt!' समूह पीछे हटने के मूड में नहीं है। समूह ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर यह स्पष्ट कर दिया है कि यह विरोध प्रदर्शन अभी थमने वाला नहीं है और उन्होंने आगामी 14 नवंबर को एक बार फिर देशव्यापी प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इस अप्रत्याशित और उग्र आंदोलन से जर्मन सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

#GermanyProtests #GenZregelt #BerlinUnrest #FrankfurtRiots #GlobalYouthMovement #GermanPolitics #BreakingNewsHindi