जितेंद्र ज्योतिषी
चाईबासा।इनदिनों चाईबासा में मतदाता सूची से नए मतदाता यानि युवा वोटर को जोड़़ने का काम चल रहा है। 18 दिसम्बर तक इस कार्य को पूर्ण करना है,ताकि आगामी 5 जनवरी तक नई मतदाता सूची का प्रकाशन हो सके पर उदासीन रवैये के बीच चाईबासा में यह अभियान सुस्त है,गौरतलब है कि चाईबासा-52 में कुल वोटरों की संख्या 2लाख 18 हज़ार 900 के लगभग है। इसमें चाईबासा शहरी इलाके में 45000 वोटर के लगभग है,जिसमे नये युवा वोटर की संख्या में इजाफा हुआ है,ऐसे ही युवा वोटर को नई मतदाता सूची से जोड़़ना था,लेकिन नई मतदाता सूची तैयार करने में योगदान देने वाले लोगो के उदासीन रवैये के कारण 18 दिसम्बर तक के निर्धारित लक्ष्य में से लगभग 6000 युवा मतदाताओं में से 1800 वोटर तक ही इस कार्य मे लगे लोग पहुँच बना पाये है। शेष 3200 यूथ तक 18 दिसम्बर तक कितनी पहुँच बनेगी यह चिंता का विषय है।इस मुद्दे पर सबसे ज्यादा चिंता राजनीतिक दलों को है सभी दलों के बीच तरह तरह की चर्चाओं का बाजार भी गर्म है,आखिर इसमे दोष किसका है,कर्मियों का राजनीतिक दलों का या पब्लिक का आज यही चिंता का विषय है।
युवा मतदाता और उदासीनता पर राजनीतिक दलों का कहना है कि लोकतंत्र के लिये यह उदासीनता शुभ संकेत नही मानी जा सकती है यह कहना है।झामुमो के जिला महा सचिव सोना देवगम का।देवगम का मानना है कि यूथ वोटर को लेकर ऐसे रवैये को कही से भी उचित नही ठहराया जा सकता,उनका यह भी कहना है कि इसके लिये वे लोग पूरी तरह से दोषी है जो इस कार्य मे लगे है,फिल्मे,गाने ढोल तमाशो,पोर्टल पर लाखों लाख रुपये खर्च हुये है,बावजूद इसके युवाओं जागरूकता नही आना चिंता का विषय तो है।
आजसू के जिलाध्यक्ष सुजीत गिरी का कहना है,अगर शासन प्रशासन के स्तर पर ठीक तरह से काम हो तो ऐसी नोबत न आये,आखिर हम युवाओ को लोकतंत्र के प्रति क्यो नही जागरूक कर पा रहे है कमी कही न कही है,केवल राजनीतिक दल की बूथ एजेंटो की सूची दे देने से जागरूकता आएगी यह सोचना बेमानी है,हर वर्ष युवाओ की नई पीढ़ी वोटर बनने लायक हो जाती है,पर मतदाता सूची में कई लोगो का नाम जुड़ ही नही पता है,लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिये ईमानदार मतदाता सूची होना अनिवार्य है।
काँग्रेस नेता त्रिसानु राय का कहना है कि हमारे दल ने इसे बहुत गम्भीरता से लिया है,हम इस विषय को लेकर उच्च स्तर पर चर्चा करेंगे कोई भी मतदाता वोट के अधिकार से वंचित नही होना चाहिये।
भाजपा के वरिष्ठ नेता अनूप सुल्तानिया ने भी इसे गम्भीर मसला बताया है,गड़बड़ तो है।मुझे तो पूरे प्रकरण में जनता और युवा वर्ग लोकतंत्र को उपेक्षा के दृष्टि कोण से देख रहे है!
पूरे प्रकरण पर निर्वाची निबंधक पदाधिकारी सह एस डीएम सशिन्द्र बड़ाइक का कहना है कि यह वोटर में जागरूकता की कमी और अपने चुनावी अधिकार के प्रति उदासीनता का परिणाम है,यूथ मतदाताओ के लिये माता पिता को भी जागरूक होना पड़ेगा अभिभावक आगर जागरूक नही होंगे तो बी एल ओ और बी एल ए क्या करेंगे।आज आवश्यकता इस बात की है कि जन जागरूकता अभिभावकों और नई पीढ़ी में विशेष रूप से लायी जाये ।
राजनीतिक दलों ने पिछले 10 सालों नही बनाये बी एल ए !वोटरों के मामले में राजनीतिक दलों का भी रहा है उदासीन रवैया शहरी इलाकों में पिछले 10 वर्षों से नही है,युवाओ में मतदाता सूची में अपना नाम चढ़़वाने की उत्सुकता।





