नई दिल्ली: भारतीय न्यायपालिका में पारदर्शिता और गरिमा बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामलों की तत्काल सुनवाई (मेंशनिंग) के दौरान होने वाली कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और ऑडियो को म्यूट करने का सख्त निर्देश दिया है। यह फैसला मुख्य रूप से इस बात को ध्यान में रखकर लिया गया है कि कुछ वकील कोर्ट की कार्यवाही का उपयोग सनसनी फैलाने और मीडिया में पब्लिसिटी पाने के लिए कर रहे हैं।
यह निर्देश मंगलवार को हुई एक सुनवाई के दौरान सामने आए वाकये के ठीक बाद आया है, जब CJI ने अदालत में पब्लिसिटी स्टंट जैसी गतिविधियों पर कड़ी नाराजगी जताई थी।
क्या था मंगलवार का पूरा मामला?
मंगलवार को सुनवाई के दौरान, एक वकील कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले को तुरंत सूचीबद्ध (Urgent listing) कराने की मांग को लेकर बेंच के समक्ष पहुंचे थे। इस जल्दबाजी के समर्थन में वकील ने राहुल गांधी के एक हालिया बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर दावा किया था कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के 200 अधिकारियों के संपर्क में हैं।
हालांकि, CJI सूर्यकांत ने इस अजीबोगरीब दलील को तुरंत सुनवाई का कोई पर्याप्त या कानूनी आधार मानने से साफ इंकार कर दिया। CJI ने तल्ख टिप्पणी करते हुए वकील से सीधा सवाल किया, “क्या आपने इसके लिए किसी न्यूज़ चैनल वालों से बात की है?” कोर्ट ने माना कि यह ‘मेंशनिंग’ पूरी तरह आधारहीन थी और इसका उद्देश्य केवल मीडिया की सुर्खियां बटोरना था।
‘मेंशनिंग’ के दौरान लाइव स्ट्रीमिंग बंद करने के मौखिक निर्देश
सुप्रीम कोर्ट का यह स्पष्ट मानना है कि अदालतों में लाइव कैमरों और स्ट्रीमिंग की सुविधा का कुछ लोग गलत फायदा उठा रहे हैं। इससे न केवल अदालत का बहुमूल्य समय बर्बाद होता है, बल्कि मामलों को अनावश्यक रूप से सनसनीखेज भी बनाया जाता है। इसे गंभीरता से लेते हुए, CJI ने अपने स्टाफ को मौखिक निर्देश दिया कि अब से अदालत कक्ष में ‘मेंशनिंग’ की प्रक्रिया के दौरान लाइव स्ट्रीमिंग को बंद या म्यूट रखा जाए।
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मामला क्या है?
यह पूरा कानूनी विवाद कर्नाटक के बीजेपी कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की शिकायत से जुड़ा है, जिन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के पास उनकी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति है। (स्पष्ट रहे कि ये केवल आरोप हैं और इन्हें अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना गया है)।
इससे पहले, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सीबीआई और ईडी को इन आरोपों की जांच का निर्देश दिया था, जिसे राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके अलावा उन्होंने मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट से दिल्ली हाई कोर्ट ट्रांसफर करने की भी मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल अगस्त में इलाहाबाद हाई कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए जांच एजेंसियों को वहां रिपोर्ट पेश करने से मना कर दिया था। साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि यदि किसी एजेंसी के पास पुख्ता जानकारी है, तो वह कानून के अनुसार अपने स्तर पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है, जिसके लिए अदालती आदेश की प्रतीक्षा करना अनिवार्य नहीं है। इसी मामले में जल्द सुनवाई की मांग के दौरान उठी असहज परिस्थितियों ने सुप्रीम कोर्ट को लाइव स्ट्रीमिंग के नियम को लेकर यह कड़ा कदम उठाने पर मजबूर किया।
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