लखनऊ।अपने जीवन से हताश होने वाले लोग जान दे देते हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अधिकतर युवा गोमती रिवर फ्रंट पर बने पुल से जान देने के लिए गोमती नदी में छलांग लगा देते हैं,लेकिन वहां मौजूद श्रीपाल निषाद ऐसे इनको बचाते हैं और उन्हें एक नया ज़ीवन देते हैं।श्रीपाल अभी तक हजारों लोगों की जान बचा चुके हैं।मगर श्रीपाल किन हालातों से गुजर रहे हैं,इनकी आर्थिक हालात कैसी है, इस पर कभी किसी का ध्यान नहीं गया।
बता दें कि कई लोगों की जिंदगी बचाने वाले श्रीपाल निषाद को पुलिस ने स्पेशल पुलिस ऑफिसर का दर्जा भी दिया है। श्रीपाल को पुलिस की तरफ से आईडेंटिटी कार्ड भी दिया गया था, लेकिन आईडेंटिटी कार्ड एक्सपायर हो चुका है।
श्रीपाल निषाद ने बताया कि वो एक गोताखोर हैं।नदी में कूदने वाले लोगों को बचाते हैं।इसके साथ की उनका काम मछली पकड़ने का है, जिससे वो अपने परिवार का पेट पालते हैं।लोगों की जान बचाने के बदले में वो पैसा नहीं लेते हैं।उनके घर की हर पीढ़ी ये काम करती आ रही है।उन्होंने बताया कि उनके बाबा और उनके पिता रामचंद्र निषाद भी ये काम करते थे।उन्होंने शिक्षा दी थी कि अगर कोई आंखों के सामने कोई अपना जीवन त्याग रहा हो तो उसे बचाने का प्रयास करना चाहिए।पिछले 40 वर्ष से यही काम कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि पुलिस से आश्वासन दिया गया था कि उनको और उनके जैसे अन्य लोगों को सरकार की ओर से मानदेय दिलाया जाएगा,लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ।
श्रीपाल ने बताया कि जैसे ही लोग गोमती नदी में छलांग लगाते हैं, तो वो भी तुरंत नदी में कूद जाते हैं और दुनिया से ऊबे हुए इंसान को मौत के मुंह से वापस छीन लाते हैं। उन्होंने बताया कि कभी-कभी ऐसा होता है कि वह पुल से कूदे हुए लोगों को नहीं देख पाते हैं, लेकिन जब उन्हें पता चलता है तो वह शव को जी जान से खोजते हैं और उसे पुलिस के हवाले कर देते हैं।उन्होंने बताया कि अबतक 10 हजार से अधिक लोगों की जान बचाई हैं।इसके अलावा 15-20 हजार लोगों के शवों को नदी से निकाला है।
श्रीपाल बताया कि गोमती नदी में नाले का पानी भी गिरता है, जिससे गोमती नदी पूरी तरीके से रसायन युक्त हो गई है।पानी बहुत ही अधिक कास्टिक हो गया है।ऐसे में जब कोई नदी में छलांग लगाता है और हम लोग बचाने जाते हैं तो शरीर जलने लगता है,कभी-कभी तो छाले पड़ जाते हैं,क्योंकि पानी बहुत अधिक खराब है।
श्रीपाल निषाद ने सरकार से अनुरोध किया कि उन लोगों को नदी में उतरने के लिए सीढ़ियां बनवा दें,क्योंकि नदी में उतरने के लिए और नाव तक जाने के लिए सीढ़ियां नहीं हैं।ऐसे में अगर सीढ़ियां होंगी तो आसानी से नदी में उतर सकेंगे और लोगों की जान बचा सकेंगे।
आपको बता दें कि श्रीपाल निषाद का छोटा भाई रामशंकर भी एक बार दो प्रेमी जोड़ों को बचाने के लिए नदी में कूद गया था। रामशंकर जब नदी में कूदा तो उसकी छाती में सरिया घुस गया था। रामशंकर का काफी दिनों तक इलाज चला था। इलाज में लगभग 1.5 लाख रुपए लगा था।इलाज में लगा पैसा श्रीपाल ने अपने पास से ही दिया था। इसके बाद भी श्रीपाल ने हिम्मत नहीं हारी और इस काम को अब तक जारी रखे हुए हैं।





