नई दिल्ली। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR - Special Intensive Revision) को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। हालांकि, राज्य में 33 फीसदी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के गंभीर आरोपों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अदालत ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ कर रही है।

3,500 पुनर्विकास परियोजनाएं बनीं चिंता की वजह: वकील अरविंद दातार

याचिकाकर्ता अरुण अनंदगिरि की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने शीर्ष अदालत के सामने प्रभावित मतदाताओं का पक्ष रखा।

  • बेघर और विस्थापित मतदाता: दातार ने पीठ को बताया कि मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में करीब 3,500 पुनर्विकास (Redevelopment) परियोजनाएं चल रही हैं। पुरानी आवासीय कॉलोनियों के तोड़े जाने से हजारों लोग अस्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हुए हैं।
  • नाम कटने का खतरा: पते और अन्य जानकारियों का सत्यापन न हो पाने की स्थिति में ऐसे हजारों नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है।
  • फॉर्म 6 के इस्तेमाल पर आपत्ति: उन्होंने मांग की कि जो लोग पहले से पंजीकृत मतदाता हैं और पिछले चुनावों में वोट डाल चुके हैं, उनसे 'फॉर्म 6' भरवाना गलत है क्योंकि यह फॉर्म केवल नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए होता है। ऐसे लोगों के लिए चुनाव आयोग को एक नया और सरल फॉर्म लाना चाहिए।

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CJI सूर्यकांत का आश्वासन: "आप चिंता मत करें, हमारे पास तारीख बढ़ाने का अधिकार"

सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता के वकील ने मतदाता सूची को अंतिम रूप देने पर रोक लगाने और समयसीमा तुरंत बढ़ाने का आग्रह किया, तब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने उन्हें आश्वस्त किया।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा: "चिंता मत कीजिए। आप एक व्हिसलब्लोअर (Whistleblower) के रूप में हमारे पास आए हैं। यदि हमें लगेगा कि बड़ी संख्या में लोग अपने दस्तावेज और दावे जमा करने से वंचित रह गए हैं, तो हम समयसीमा बढ़ा सकते हैं। एसआईआर से जुड़े पिछले कई मामलों में भी हमने अंतिम तारीखें बढ़ाई हैं।"

अदालत ने स्पष्ट किया कि समयसीमा पर फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया जा रहा है, लेकिन अगली सुनवाई में परिस्थितियों की समीक्षा के बाद आवश्यक निर्देश दिए जा सकते हैं।

मामले के मुख्य बिंदु एक नज़र में

विषयविवरण
याचिकाकर्ताअरुण अनंदगिरि (वरिष्ठ अधिवक्ता: अरविंद दातार)
सुप्रीम कोर्ट की पीठCJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची, जस्टिस वी. मोहना
मुख्य आरोपएसआईआर प्रक्रिया के दौरान महाराष्ट्र में 33% मतदाताओं के नाम हटाए गए
सुप्रीम कोर्ट का रुखचुनाव आयोग को नोटिस जारी; समयसीमा पर रोक से फिलहाल इनकार
अगली सुनवाई की तिथि5 नवंबर

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