गांधीनगर। गुजरात में इस मानसून सीजन के दौरान हुई कम वर्षा के कारण बने विषम हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बेहद संवेदनशील और किसान हितैषी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राज्य के चार प्रमुख जिलों—देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर और कच्छ—को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है।
मानसून की बेरुखी से फसलों और पशुधन पर मंडरा रहे संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों और पशुपालकों की आजीविका की सुरक्षा के लिए एक व्यापक राहत पैकेज का ऐलान किया है। सरकार का यह सूखा आदेश आगामी छह महीनों तक लागू रहेगा, जिसके तहत प्रभावित क्षेत्रों में बहुआयामी सहायता योजनाएं चलाई जाएंगी।
1. फसल क्षति पर प्रति हेक्टेयर ₹8,500 की वित्तीय सहायता
कम बारिश के कारण जिन किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं, उन्हें आर्थिक तंगी से उबारने के लिए सरकार ने सीधे मुआवजे की घोषणा की है:
- राहत राशि: प्रति हेक्टेयर ₹8,500 की दर से मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
- अधिकतम सीमा: यह सहायता राशि अधिकतम दो हेक्टेयर (2 Hectares) तक की जोत वाले किसानों को दी जाएगी।
- प्रक्रिया: पात्रता मानदंड और आवेदन की विस्तृत प्रक्रिया को लेकर जल्द ही एक आधिकारिक सरकारी अधिसूचना जारी की जाएगी, जिससे पारदर्शी तरीके से राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच सके।
2. रियायती दर पर चारे की व्यवस्था: 3 करोड़ किग्रा स्टॉक तैयार
सूखे की स्थिति में सबसे बड़ा संकट मवेशियों के चारे और पानी का होता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में चारे की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी:
- अब तक वितरण: सरकार द्वारा अब तक 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा मात्र ₹2 प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर वितरित किया जा चुका है।
- भविष्य की तैयारी: वर्तमान में राज्य सरकार के पास 3 करोड़ किलोग्राम चारे का बफर स्टॉक उपलब्ध है। यदि जरूरत बढ़ी तो अतिरिक्त चारा आपूर्ति के लिए भी विशेष योजना तैयार रखी गई है।
3. पशु शिविरों में प्रति मवेशी ₹80 की दैनिक सहायता
पशुपालकों पर मवेशियों के रखरखाव का आर्थिक बोझ न पड़े, इसके लिए सरकार ने पशु शिविरों (Cattle Camps) के संचालन को मजबूती दी है:
- दैनिक अनुदान: पशु शिविरों में रखे गए प्रत्येक पशु के लिए ₹80 प्रति दिन की सहायता राशि दी जाएगी।
- अतिरिक्त मदद: मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि यदि परिस्थितियां और कठिन होती हैं, तो आवश्यकतानुसार पशुपालकों को अतिरिक्त वित्तीय व भौतिक मदद भी उपलब्ध कराई जाएगी।
4. प्रभावित गांवों में 150 दिनों का सुनिश्चित रोजगार
सूखा प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने और पलायन को रोकने के लिए रोजगार की गारंटी दी गई है:
- रोजगार की अवधि: प्रभावित जिलों के गांवों में वीबी-जी रामजी योजना के तहत 150 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
- 6 महीने का रोडमैप: सूखा काल की 6 महीने की अवधि के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी परिवार को आजीविका के संकट का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का संदेश:
"कम वर्षा से उपजी यह प्राकृतिक चुनौती बड़ी है, लेकिन गुजरात सरकार राज्य के प्रत्येक किसान और पशुपालक के साथ मजबूती से खड़ी है। फसल क्षतिपूर्ति, चारे की सस्ती उपलब्धता और रोजगार के जरिए हम यह सुनिश्चित करेंगे कि ग्रामीण इलाकों में किसी को भी कोई कठिनाई न हो।"
प्रमुख बिंदु एक नज़र में
| राहत उपाय | विवरण / सीमा |
| सूखाग्रस्त जिले | देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, जामनगर, कच्छ |
| फसल क्षति मुआवजा | ₹8,500 प्रति हेक्टेयर (अधिकतम 2 हेक्टेयर तक) |
| रियायती चारा | ₹2 प्रति किग्रा (3 करोड़ किग्रा स्टॉक उपलब्ध) |
| पशु शिविर सहायता | ₹80 प्रति पशु प्रतिदिन |
| रोजगार गारंटी | 150 दिनों का रोजगार (वीबी-जी रामजी योजना) |
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