प्रतिनिधि,चतरा। चतरा जिला इन दिनों डेंगू और टायफाइड का हार्ड जोन बन चुका है। ऐसा कोई घर नहीं है जो इस बीमारी के चपेट में नहीं है। इसकी बानगी देखनी हो तो सदर अस्पताल चतरा आ जाइए। जहां प्रति दिन 400 से अधिक मरीजों का उपचार किया जाता है। इनमें से जांच के दौरान 50 से अधिक मरीज टायफाइड से ग्रसित मिल जायेंगें और करीब इतने ही लोगों का प्लेटलेट डाउन मिलेगा। कुछ ऐसी ही स्थिति सभी प्रखंडों में संचालित सीएचसी या पीएचसी में आने वाले मरीजों का भी है। बावजूद जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सो रही है। इस बीमारी के रोक थाम के लिए ना तो सही ढंग से छिड़काव हो पा रहा है और ना ही फॉगिंग कराया जा रहा है। खासकर इस मामले में नगरपालिका की गतिविधि शून्य है। नगर पालिका प्रशासन को सभी वार्डों में छिड़काव के साथ साथ फॉगिंग भी करानी चाहिए। परंतु उसके द्वारा छिड़काव न कराकर फॉगिंग का कार्य मेन रोड में कराकर खाना पूर्ति कर छोड़ दिया जा रहा है। मेन रोड में छिड़काव करने से स्थिति ऐसी उत्पन्न हो जा रही है कि मेन रोड के मच्छर भागकर घरों में घुस जा रहे हैं और घरों में मच्छरों का प्रकोप न सिर्फ बढ़ जा रहा है बल्कि लोगों को और बीमार कर रहे हैं। अगर समय रहते जिला प्रशासन ने इस मामले में एक्शन नहीं लिया तो सम्पूर्ण चतरा जिला डेंगू के चपेट में आ जायेगा और कई लोगों की जान चली जायेगी।





