विशेष संवाददाता
नई दिल्ली / लेह:
लद्दाख के भविष्य, संवैधानिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांगों को लेकर प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। वांगचुक ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा है कि लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्र के लोग बेहद आहत हैं और सरकार की लचर नीति के कारण हम पर चीन की ओर से दबाव बढ़ता जा रहा है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) की सब-कमेटी के प्रतिनिधियों और केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बैठकों का दौर जारी है।
‘15 अक्टूबर की बैठक रही विफल, सरकार अपने वायदों से पीछे हटी’
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर वीडियो और पोस्ट के जरिए अपनी बात रखते हुए सोनम वांगचुक ने बताया कि 15 अक्टूबर को लेह में गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई बैठक पूरी तरह विफल रही थी, क्योंकि उसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला।
- दिल्ली बुलावा और नया गतिरोध: वांगचुक ने बताया कि सरकार की ओर से 22 अक्टूबर (गुरुवार) को दिल्ली में बैठक का आश्वासन दिया गया था, जिसके तहत वे खुद दिल्ली पहुंचे हैं।
- असंतोष: उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि सरकार लगातार अपने वादों से मुकर रही है। सीमावर्ती क्षेत्र के लोग इन परिस्थितियों को लेकर बेहद दुखी और चिंतित हैं।
‘चीन की तरफ से आ रहा है दबाव’
सोनम वांगचुक ने लद्दाख की सामरिक स्थिति (Strategic Location) और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा:
"हम पर चीन की तरफ से दबाव आ रहा है। चीन के लोग कहते हैं कि जब भारत सरकार खुद लद्दाख को उसकी संवैधानिक पहचान और मान्यता नहीं देती है, तो लद्दाख उनका हिस्सा है।"
वांगचुक ने भावुक होते हुए कहा कि जिस भारत से वे अथाह प्रेम करते हैं, यदि वह देश और उसकी सरकार अपने वादों से पीछे हटेगी और लद्दाख के लोगों को देश के बाकी हिस्सों के नागरिकों के समान अधिकार नहीं देगी, तो स्थिति और गंभीर हो जाएगी। उन्होंने अफसोस जताया कि आज लद्दाख के लोग लोकतंत्र के बुनियादी अधिकारों—जैसे वोट डालने और अपनी पसंद की स्थानीय सरकार चुनने के हक—से भी वंचित हैं।
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लद्दाख की प्रमुख मांगें क्या हैं?
गौरतलब है कि लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद से वहाँ के लोग लगातार केंद्र सरकार से निम्नलिखित चार प्रमुख मांग कर रहे हैं:
- संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule): लद्दाख की विशेष संस्कृति, भूमि और पहचान की रक्षा के लिए छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करना।
- पूर्ण राज्य का दर्जा: लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए।
- लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व: लेह और कारगिल के लिए अलग से लोकतांत्रिक पावर्ड हिल काउंसिल (Autonomous Hill Development Councils) को और अधिक अधिकार दिए जाएं तथा संसद में उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।
- युवाओं के लिए रोजगार: क्षेत्र में बेरोजगारी की समस्या दूर करने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाए जाएं।
सोनम वांगचुक ने दिल्ली पहुंचकर लद्दाख भवन में मीडिया से बातचीत करने और आगे की रणनीति साझा करने की बात कही है। इस संवेदनशील मसले पर सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच आगे क्या रुख रहता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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