नई दिल्ली। देश में गोवंशीय पशुओं को प्रभावित करने वाली खतरनाक बीमारी लंपी स्किन डिजीज (LSD) का प्रकोप एक बार फिर पैर पसारता दिख रहा है। केंद्र और राज्य स्तरीय अलर्ट रिपोर्ट के अनुसार, देश के 29 राज्यों के लगभग 220 जिलों में इस बीमारी के फैलने की गंभीर आशंका जताई गई है। इसके बाद सभी प्रभावित राज्यों के पशुपालन विभागों और पशुपालकों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित और जोखिम वाले राज्य

सरकारी आंकड़ों और रिपोर्ट के मुताबिक:

  • बिहार: सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में शामिल है, जहां के 27 जिलों में संक्रमण फैलने की आशंका है।
  • मध्य प्रदेश: राज्य के लगभग 10 जिलों को लंपी के उच्च जोखिम वाली सूची में रखा गया है।
  • अन्य राज्य: तमिलनाडु, राजस्थान, झारखंड, कर्नाटक और गोवा के भी कई जिले संभावित खतरे वाले क्षेत्रों की श्रेणी में हैं।

क्या है लंपी स्किन डिजीज और कैसे फैलता है?

लंपी स्किन डिजीज एक विषाणु जनित (Viral) संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से गायों और अन्य मवेशियों को निशाना बनाती है।

  • संक्रमण के कारण: यह बीमारी मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और किलनी (Ticks) जैसे खून चूसने वाले कीटों के जरिए एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है।
  • प्रमुख लक्षण: संक्रमित पशु को तेज बुखार आना, पूरे शरीर पर गांठें (Nodules) बनना, त्वचा पर घाव होना, अत्यधिक कमजोरी आना और दूध उत्पादन में अचानक भारी गिरावट होना इसके मुख्य लक्षण हैं।

पशुपालक क्या बरतें सावधानियां?

पशुपालन विभाग ने लंपी के प्रसार को रोकने के लिए पशुपालकों को निम्नलिखित एहतियाती कदम उठाने की सलाह दी है:

  • साफ-सफाई और कीट नियंत्रण: पशु बाड़े के आसपास पानी जमा न होने दें और मच्छर-मक्खियों को नियंत्रित करने के लिए कीटनाशक या प्राकृतिक उपायों का उपयोग करें।
  • संक्रमित पशुओं को अलग करना (Isolation): किसी भी पशु में लक्षण दिखते ही उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं के समूह से अलग कर दें।
  • त्वरित चिकित्सीय परामर्श: लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क कर टीकाकरण और आवश्यक उपचार कराएं।

मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में पूर्व में आए मामलों को देखते हुए पशुपालन विभाग ने पहले ही बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाने और सख्त निगरानी रखने के निर्देश जारी कर दिए हैं।