राजस्थान सरकार ने राज्य में उर्वरक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने और खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राजसमंद और सिरोही जिलों में सफल ट्रायल के बाद अब पूरे राजस्थान में 'डिजिटल फर्टिलाइजर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम' लागू कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत किसानों को खाद (यूरिया, DAP आदि) प्राप्त करने के लिए 'फार्मर आईडी' (Farmer ID) प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

फार्मर आईडी क्या है और क्यों पड़ी इसकी आवश्यकता?

  • 11 अंकों की यूनीक पहचान: फार्मर आईडी (किसान रजिस्ट्री) 11 अंकों का एक डिजिटल नंबर है, जो किसान के जमीन के रिकॉर्ड (जमाबंदी), फसल और बैंक खाते से जुड़ा होता है।
  • रकबे के अनुसार खाद: अब तक कई बार आवश्यकता से अधिक खरीदारी या सब्सिडी वाली खाद को बाजार में बेचे जाने की शिकायतें आती थीं। नई प्रणाली से किसान की जमीन के कुल क्षेत्रफल (रकबे) के हिसाब से तय मात्रा में ही पारदर्शी तरीके से खाद उपलब्ध कराई जाएगी।

आईडी बनवाने के लिए आवश्यक दस्तावेज:

  • आधार कार्ड (जिसमें चालू मोबाइल नंबर लिंक हो, क्योंकि प्रक्रिया OTP पर आधारित है)
  • जमीन के दस्तावेज (अद्यतन जमाबंदी)
  • बैंक खाते की पासबुक/विवरण
  • सक्रिय मोबाइल नंबर

घर बैठे ऑनलाइन फार्मर आईडी बनाने की प्रक्रिया:

  1. पोर्टल पर जाएं: राजस्थान के आधिकारिक फार्मर रजिस्ट्री पोर्टल rjfr.agristack.gov.in पर लॉगिन करें।
  2. KYC प्रक्रिया: 'किसान लॉगिन' विकल्प चुनें, मोबाइल और आधार नंबर दर्ज कर प्राप्त OTP के माध्यम से ई-केवाईसी (e-KYC) पूरी करें।
  3. जमीन का विवरण भरें: अपने गांव, तहसील, खसरा नंबर और बैंक विवरण दर्ज करें।
  4. आईडी जनरेट करें: सहमति (Consent) देकर फॉर्म सबमिट करें। सिस्टम द्वारा जमीन के रिकॉर्ड और आधार डेटा का मिलान होते ही 11 अंकों की फार्मर आईडी तुरंत जनरेट हो जाएगी।