इंदौर। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की व्यावसायिक बागवानी योजना के नियमों में किए गए अचानक बदलावों ने देशभर के किसानों और युवाओं के बीच नई चिंता पैदा कर दी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी की पॉलीहाउस परियोजना को ₹99.60 लाख की सब्सिडी मंजूर होने, बाद में उनके द्वारा राशि वापस किए जाने और इसके तुरंत बाद बोर्ड द्वारा सब्सिडी नियमों को कड़ा करने के घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सब्सिडी दर 50% से घटाकर 35% की गई

एनएचबी द्वारा जारी नए प्रावधानों के तहत हाईटेक और संरक्षित खेती के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता की दरों में कटौती की गई है:

  • सामान्य क्षेत्र: वाणिज्यिक बागवानी, पॉलीहाउस, टिश्यू कल्चर, मशरूम और पोस्ट-हार्वेस्ट घटकों के लिए सब्सिडी अब 50% से घटाकर 35% कर दी गई है।
  • विशेष क्षेत्र: उत्तर-पूर्वी राज्यों, हिमालयी क्षेत्रों, अनुसूचित क्षेत्रों और निर्धारित विशेष क्षेत्रों के लिए वित्तीय सहायता की दर 45% तय की गई है।

बढ़ती लागत के बीच घटती सहायता से किसान परेशान

हाईटेक खेती अपना रहे किसानों का कहना है कि पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई, फर्टिगेशन, मल्चिंग और प्लास्टिक सामग्रियों की कीमतें पहले ही आसमान छू रही हैं। इसके अलावा भू-राजनीतिक कारणों से सब्सिडी-रहित घुलनशील उर्वरकों (Soluble Fertilizers) की कीमतों में 40% से अधिक की वृद्धि हुई है।

ऐसे समय में सरकारी सहायता की दर घटने से परियोजना का जोखिम और लागत दोनों बढ़ जाएंगे। विशेषकर कृषि में करियर बनाने वाले शिक्षित युवाओं और छोटे-मध्यम किसानों के लिए बैंक ऋण व परिचालन खर्च निकालना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

नियमों में कड़े बदलाव: परिवार से सिर्फ एक सदस्य को लाभ

योजना में दोहराव और दुरुपयोग रोकने के नाम पर एनएचबी ने पात्रता शर्तों को भी काफी सख्त कर दिया है:

  1. एक परिवार, एक लाभ: परिवार (पति/पत्नी, माता-पिता, पुत्र-पुत्री) के केवल एक ही सदस्य को एनएचबी की किसी भी योजना का लाभ मिलेगा। यदि परिवार में किसी को पहले लाभ मिल चुका है, तो दूसरा सदस्य पात्र नहीं होगा।
  2. सख्त पेनल्टी: गलत घोषणा या जानकारी देकर लाभ लेने पर राशि को भारी ब्याज के साथ वसूला जाएगा।
  3. लंबित आवेदनों पर असर: बोर्ड के पास पहले से लंबित LoC/GoC आवेदनों और सब्सिडी दावों का निपटारा भी इन्हीं नए संशोधित नियमों के तहत किया जाएगा।

यद्यपि एनएचबी के आधिकारिक आदेश में इन बदलावों को केंद्रीय मंत्री की परियोजना से सीधे तौर पर नहीं जोड़ा गया है, लेकिन किसान संगठनों की मांग है कि कृषि लागत में वृद्धि को देखते हुए सब्सिडी में की गई इस कटौती पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए।