झारखंड।विश्व आदिवासी दिवस सोमवार को धूमधाम से मनाया गया।राज्य के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कई तरह के रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन हुआ।कुछ जगहों पर आदिवासी संगठनों द्वारा बैनर-पोस्टर लेकर सरकार से अपनी मांगों को भी रखा।चाहे सरना को अलग धर्म कोड देने की मांग हो या चाहे लोहरा और चिक बड़ाइक समाज को जनजाति के रूप में मान्यता देने की मांग हो।कई आदिवासी संगठनों ने धर्मांतरण को भी बड़ा मुद्दा बनाते रहे हैं।इन संगठनों का पक्ष है कि वे सरना धर्म कोड को मानते हैं।ऐसे में वे खुद को न तो हिन्दू कहलाना चाहते हैं और न ही इसाई या फिर कोई और धर्म।उनका कहना है कि उनके पूर्वज शुरू से प्रकृति की पूजा करते आए हैं और यही उनका धर्म है। केंद्र सरकार को सरना को अलग-अलग धर्मकोड की मान्यता देनी चाहिए। इसके लिए वे लोग कई वर्षों से आंदोलन कर रहे हैं और आगे भी अपनी मांगों को सरकार के सामने रखते रहेंगे।



रांची शहर के विभिन्न चौक चौराहों व से शोभा यात्रा निकाली गई।जबकि कई संगठनों ने मोटर साइकिल जुलूस भी निकाला।इस दौरान कई आदिवासी सामाजिक धार्मिक संगठन जुलूस की शक्ल में चौराहों पर पहुंचे और झारखंड के वीर शहीदों को पुष्प अर्पित किया।पूरे शहर में जनजातीय समुदाय के लोग पारंपरिक वेशभूषा और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ शोभा यात्रा और जुलूस में शामिल हुए।



जय आदिवासी-जय जय आदिवासी, आदिवासी एकता जिंदाबाद के नारों के साथ लोग जुलूस में शामिल हुए। केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की के नेतृत्व में पुराने विधानसभा परिसर से मोटर साइकिल जुलूस निकाला गया,जो बिरसा चौक पहुंचा। वहां भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए लोगों के बीच पर्यावरण का संदेश देते हुए पौधा वितरण किया गया। इसके बाद नाचते गाते हुए जुलूस सुजाता चौक होते हुए अलबर्ट एक्का चौक तक पहुंचा।

दूसरी तरफ जय आदिवासी केंद्रीय परिषद ने चंदन हलधर पहान और निरंजना हेरेंज की अगुवाई में पूरे शहर में पारंपरिक वेशभूषा के साथ मोटर साइकिल जुलूस निकाला।पूर्व में कोकर समाधि स्थल जाकर श्रद्धासुमन अर्पित किया।इसके अलावा अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के लोग भी जुलूस की शक्ल में अलबर्ट एक्का चौक आए। सभी नाचते गाते हुए विश्व आदिवासी दिवस की खुशियां मनाईं।

इसके अलावा हरमू स्थित देशावली में विश्व आदिवासी दिवस पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसकी अगुवाई केंद्रीय सरना समिति के नारायण उरांव ने की। इसी क्रम में कई संगठनों ने ऑनलाइन विचार गोष्ठी का आयोजन किया। झारखंड इंडीजिनियस पीपुल्स फोरम द्वारा पेसा कानून पर सेमिनार का आयोजन किया गया। विश्व आदिवासी दिवस को लेकर पूरे दिन राजधानी रांची में कई संगठनों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किये गए, साथ ही आदिवासियों के अधिकार, संस्कृति-परंपरा सहित अन्य मुद्दों पर मंथन किया गया।



सिमडेगा में विश्व आदिवासी दिवस पर कई कार्यक्रम हुए। लोग पारंपरिक वेशभूषा ढोल नगाड़े के ताल पर थिरकते हुए परमवीर अलबर्ट एक्का स्टेडियम से निकलकर कचहरी होते हुए महावीर चौक होकर नगर भवन पहुंचे। वहां भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए श्रद्धांजलि दी। मौके पर विधायक भूषण बाड़ा सहित कई आदिवासी संगठनों के लोग मौजूद रहे।



गढ़वा में भी आदिवासी संगठनों ने पांरपरिक वेशभूषा में धूमधाम से आदिवासी दिवस मनाया और आदिवासी अधिकारों की मांगों को लेकर बैनर-पोस्टर से सरकार के सामने अपनी मांगें भी रखीं। गढ़वा जिला मुख्यालय सहित सुदूरवर्ती चिनिया, भंडरिया सहित अन्य प्रखंडों में विश्व आदिवासी दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। चिनिया में में विश्व आदिवासी दिवस पर स्वतंत्रता सेनानी दुखी सिंह खरवार के प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।

यह कार्यक्रम अखिल भारतीय आदिवासी महासभा द्वारा आयोजित किया गया। आईटीआई भवन में लोकनृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उसके बाद सभा आयोजित की गई। काफी संख्या में आदिवासी-महिला पुरुष कार्यक्रम में शामिल हुए। मौके पर आदिवासियों के संस्कार, संस्कृति और भाषा को बचाने पर बल दिया गया। आदिवासी दर्शन में प्रकृति के साथ आदिवासी जीवन यापन करते हैं। उसी तरह भंडरिया में आयोजित कार्यक्रम में भी आदिवासियों की संस्कृति, परंपरा को बचाने की जरूरत है। वक्ताओं ने कहा दुनिया के 90 देशों में आदिवासी निवास करते हैं।



भारत में 11 करोड़ आबादी है। उनमें से आधे से अधिक लोगों को जीवन स्तर अभी भी निम्न है। जिला मुख्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। वहां कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों डॉक्टर सुधीर कुमार झा, अमरेश चंद्र पांडेय,ओर डॉ सुषमा ललिता बाखला ने किसानों को खेती से संबंधित समस्याओं की जानकारी दी।