ब्यूरो





चाईबासा।सिंहभूम अब पश्चिमी सिंहभूम जिला जिसे देश के पुराने जिले में से एक माना जाता है।इस जिले को संचालित करने के लिये शासन प्रशासन के स्तर पर कई व्यवस्था और विभाग कार्यरत है।सरकार के स्तर से कई जिला समितियों का निर्माण भी हुआ है,टाउन क्लब समिति,पिल्लई हाल संचालन समिति,जिला खेल समिति सड़क सुरक्षा समिति ,जिला अस्पताल प्रबंधन समिति,पर्यावरण समिति जिला शांति एवम सुरक्षा समिति ,परिवहन समिति ,सिंहभूम स्पोटर्स एसोशिएसन,जिला खेल एवम पर्यटन समिति,बैडमिंटन एसोशिएशन सिहभूम एडवेंचर तीरंदाजी संघ,बॉक्सिंग एसोशिएशन आदि बहुतेरी समितियां है।इनमे से कई समितियों का आज़ादी के बाद से ही गठन होने के बाद पुनर्गठन नही हुआ है और एक्का दुक्का का पुनर्गठन हुआ भी है तो उनमें एक से अधिक समितियों में दवाब में प्रभाव में या स्वभाव से या तो एक व्यक्ति का चेहरा नज़र आयेगा या जो अब दुनिया मे नही है उनका भी नाम नज़र आयेगा।उपर्युक्त खेल से जुड़ी कुछ समितियां तो कठपुतली नाच का उदाहरण पेश कर रही है।





खेल के खेल में कठपुतलिया तो सामने नज़र आती है,लेकिन उनकी बागडोर जिले से बाहर या तो राजधानी में है या फिर टाटा नगर में है।उपर्युक्त सभी समितियों का इतना अच्छा काम हो रहा है कि खेल की गतिविधिया अब सिर्फ सरकार के भरोसे है।मानव कल्यान के नाम पर भी कई समितियां है किंतु यह मानव कल्याण कितना करती है यह आपको जिला अस्पताल परिषर मे नज़र आएगा। यहां मरीज से ज्यादा निर्मित होते हुये भवन नज़र आएंगे। विभिन्न अस्पतालों में मरीजो के लिये बैठक कम और व्यपार के लिये अधिक होंगी।इसके पीछे एक मात्र कारण है समितियों का पुनर्गठन नही होना।यही जिले के सर्वांगीण विकास का दावा यही आकर पस्त हो जाता है।अब उपर्युक्त सभी सरकार द्वारा नामित/निर्मित समितियों का पुनर्गठन क्यो नही हो रहा है,इसके पीछे क्या कारण है,राजनीतिक आर्थिक या सामाजिक यही चिंता और चिंतन का विषय है।