प्रतिनिधि,चतरा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संस्थागत प्रसव में मिलने वाली प्रोत्साहन राशि की बंदरबांट में अस्पताल से लेकर सहिया तक की भूमिका संदिग्ध है।प्रोत्साहन के तहत मिलने वाली राशि का बंदरबांट चिकित्सा पदाधिकारी, एएनएम, सहिया व ममता वाहन चालक के बीच ही बटती है।अगर राशि का बंदरबांट नही होता, तो इतना बड़ा घोटला सामने नही आता,क्योंकि संस्थागत प्रसव के तहत मिलने वाली राशि का भुगतान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के हस्ताक्षर से ही हाेती है।





यहां बता दें कि चतरा जिला में कुल 135 ममता वाहन चालक है,जिन्हे प्रति किलो मीटर 10 रूपये की राशि भुगतान होती है।वही सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली महिलाओं को 1400 रूपये सरकार की ओर से प्रोत्साहन के रूप में भुगतान किया जाता है। महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए लाने वाली सहिया को तीन सौ रूपये राशि नकद मिलता है।इस प्रकार कुल 1700 रूपये सरकार की ओर से प्रसुता और सहिया के बीच खर्च किया जाता है।





ऐसे में निजी क्लीनिको में प्रसव कराने वाली महिलाओं का ब्योरा लेकर सहिया अपने-अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या उप स्वास्थ्य केंद्र में जाकर एएनएम की मदद से फर्जीवाड़ा करते हुए नाम व पता इंट्री करा लेती है। उसके बाद संबंधित चिकित्सा पदाधिकारी से राशि निकालकर बंदरबांट कर लिया जाता है।यदि मामले की जांच कराई गई तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।चूंकि हाल ही में एक महिला का निजी अस्पताल में संस्थागत प्रसव हुआ था,लेकिन नाम सरकारी अस्पताल के रजिस्टर में दर्ज कर रुपयों के बंदरबांट कर लिया गया।